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भगवान शिव को प्रसन्न कर रावण ने प्राप्त की चंद्रहास
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Ramleela
रियासी। पहले नवरात्र पर ओपन एयर थियेटर में मुख्य दृश्यों का मंथन कर वार्षिक रामलीला का आगाज हुआ है। दृश्यों के मचंन से पहले गणेश की वंदना कर भगवान श्री राम के जयघोष लगाए गए।
रामलीला का पहला दृश्य कैलाश तलहटी का दर्शाया गया। इसमें कैलाश पर्वत को पार करते समय रावण का विमान रुक जाता है, जिसकी वजह जानने की बजाए रावण कैलाश को उठा कर दूर फेंकने की कोशिश करता है। लेकिन थक हार जाता है। भगवान शिव की स्तृति कर उन्हें खुश करता है, जिसके फलस्वरूप उसे चंद्रहास तलवार प्राप्त होती है। दृश्य में अतुल केसर ने शिव, सत्यदेव ने नंदीगण, सोनू गुजराती ने रावण और विशाल पंडोह ने मारीच की भूमिका निभाई है।
दूसरा दृश्य वेदमती-रावण संवाद का दर्शाया गया। इसमें वेदमती की खूबसूरती से मोहित हो कर रावण विवाह का प्रस्ताव रखता है। भगवान विष्णु की उपासक रावण के छू लेने से अग्नि में समा जाती है और उसे श्राप देती है कि अगले जन्म में वह उसकी मौत का कारण बनेगी। दृश्य में हरीश मगोत्रा ने रावण और ममता ने वेदमती के किरदार को निभाया है। तीसरे दृश्य में रावण के अत्याचारों से तंग आ कर सभी देवता विष्णु लोक जा कर अपनी व्यथा और रावण के अत्याचारों के बारे में सुनाते हैं। इसके बाद विष्णु देवताओं को जल्द ही धरती लोक पर जन्म लेने और रावण का अंत करने का आश्वासन देते हैं।
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रामलीला का पहला दृश्य कैलाश तलहटी का दर्शाया गया। इसमें कैलाश पर्वत को पार करते समय रावण का विमान रुक जाता है, जिसकी वजह जानने की बजाए रावण कैलाश को उठा कर दूर फेंकने की कोशिश करता है। लेकिन थक हार जाता है। भगवान शिव की स्तृति कर उन्हें खुश करता है, जिसके फलस्वरूप उसे चंद्रहास तलवार प्राप्त होती है। दृश्य में अतुल केसर ने शिव, सत्यदेव ने नंदीगण, सोनू गुजराती ने रावण और विशाल पंडोह ने मारीच की भूमिका निभाई है।
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दूसरा दृश्य वेदमती-रावण संवाद का दर्शाया गया। इसमें वेदमती की खूबसूरती से मोहित हो कर रावण विवाह का प्रस्ताव रखता है। भगवान विष्णु की उपासक रावण के छू लेने से अग्नि में समा जाती है और उसे श्राप देती है कि अगले जन्म में वह उसकी मौत का कारण बनेगी। दृश्य में हरीश मगोत्रा ने रावण और ममता ने वेदमती के किरदार को निभाया है। तीसरे दृश्य में रावण के अत्याचारों से तंग आ कर सभी देवता विष्णु लोक जा कर अपनी व्यथा और रावण के अत्याचारों के बारे में सुनाते हैं। इसके बाद विष्णु देवताओं को जल्द ही धरती लोक पर जन्म लेने और रावण का अंत करने का आश्वासन देते हैं।
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