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सुचेतगढ़ बॉर्डर पर नहीं रुक रहे पर्यटक
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सुचेतगढ में पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटको के लिए बनाया गया भवन
- फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। सुचेतगढ़ बॉर्डर को वाघा बॉर्डर की तरह विकसित करने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। बॉर्डर के विकास नाम पर छह साल पहले भवन निर्माण किया गया था, ताकि पर्यटक यहां ठहर सके। कैंटीन भी खुलवाई गई थी, लेकिन यह जगह पर्यटकों को रोक पाने में विफल साबित हो रही है। दरअसल, पर्यटकों के लिए बॉर्डर पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।
भारत-पाक सीमा के साथ सटे सुचेतगढ़ को पर्यटन स्थल के तौर उभारे जाने की योजना सरकार ने बनाई थी। इसके तहत वर्ष 2013 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री गुलाम हसन मीर ने सांसद मदन लाल शर्मा व पर्यटन राज्यमंत्री सज्जाद अहमद किचलू की मौजूदगी में यहां बनाए भवन का उद्घाटन किया गया था। लेकिन यहां आने वाले पर्यटक बॉर्डर देखने के बाद लौट जाते हैं। यहां सुविधाओं के अभाव के कारण कोई रुकता नहीं है।
पर्यटन विभाग की ओर से रात को रुकने के लिए सिर्फ कमरे भी बनाए गए, सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया। सीमावर्ती क्षेत्र में मोबाइल फोन का नेटर्वक नहीं होना भी पर्यटकों के ठहरने में बड़ी बाधा बन रही है। राज्य सरकार द्वारा इस स्थान को वाघा बार्डर की तर्ज पर विकसित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
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अलबत्ता पर्यटन विभाग की ओर से वहां पर कैंटीन खुलवाई गई, लेकिन शाम होने पर वहां पर कोई सुविधा नहीं मिल पाती। आसपास रहने वाले लोगों ने भी वहां पर चाय की दुकानें खोल रखी है। भारत-पाक सीमा देखने के लिए वहां पर सीमा सुरक्षा बलों द्वारा ही पर्यटकों को सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है। पर्यटन विभाग यहां एक अधिकारी सहित कुल छह कर्मियों को नियुक्त किया, पर वे पर्यटकों को केवल प्राचीन रघुनाथ मंदिर दिखाते हैं।
सड़क दोहरीकरण का कार्य अधर में
आरएस पुुरा से सुचेतगढ़ तक सड़क दोहरीकरण का कार्य भी अधर में ही लटका है। एक वर्ष पहले काम शुरू किया गया था, पर अभी तक सिर्फ पुलियों का निर्माण ही किया जा सका है। सड़क के दोहरीकरण का कार्य अटका हुआ है। इस समय भी इस सड़क की जर्जर हालत बनी हुई है। बदहाल सड़क पर्यटकों को खटकता है।
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भारत-पाक सीमा के साथ सटे सुचेतगढ़ को पर्यटन स्थल के तौर उभारे जाने की योजना सरकार ने बनाई थी। इसके तहत वर्ष 2013 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री गुलाम हसन मीर ने सांसद मदन लाल शर्मा व पर्यटन राज्यमंत्री सज्जाद अहमद किचलू की मौजूदगी में यहां बनाए भवन का उद्घाटन किया गया था। लेकिन यहां आने वाले पर्यटक बॉर्डर देखने के बाद लौट जाते हैं। यहां सुविधाओं के अभाव के कारण कोई रुकता नहीं है।
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पर्यटन विभाग की ओर से रात को रुकने के लिए सिर्फ कमरे भी बनाए गए, सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया। सीमावर्ती क्षेत्र में मोबाइल फोन का नेटर्वक नहीं होना भी पर्यटकों के ठहरने में बड़ी बाधा बन रही है। राज्य सरकार द्वारा इस स्थान को वाघा बार्डर की तर्ज पर विकसित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
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अलबत्ता पर्यटन विभाग की ओर से वहां पर कैंटीन खुलवाई गई, लेकिन शाम होने पर वहां पर कोई सुविधा नहीं मिल पाती। आसपास रहने वाले लोगों ने भी वहां पर चाय की दुकानें खोल रखी है। भारत-पाक सीमा देखने के लिए वहां पर सीमा सुरक्षा बलों द्वारा ही पर्यटकों को सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है। पर्यटन विभाग यहां एक अधिकारी सहित कुल छह कर्मियों को नियुक्त किया, पर वे पर्यटकों को केवल प्राचीन रघुनाथ मंदिर दिखाते हैं।
सड़क दोहरीकरण का कार्य अधर में
आरएस पुुरा से सुचेतगढ़ तक सड़क दोहरीकरण का कार्य भी अधर में ही लटका है। एक वर्ष पहले काम शुरू किया गया था, पर अभी तक सिर्फ पुलियों का निर्माण ही किया जा सका है। सड़क के दोहरीकरण का कार्य अटका हुआ है। इस समय भी इस सड़क की जर्जर हालत बनी हुई है। बदहाल सड़क पर्यटकों को खटकता है।