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शाहपुर कंडी परियोजना पर पंजाब ने बढ़ाया हाथ
ब्यूरो, अमर उजाला/कठुआ
Updated Fri, 13 May 2016 11:55 AM IST
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शाहपुर कंडी परियोजना
- फोटो : Amar Ujala
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने एक बार फिर नई सरकार के गठन के बाद शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर सरकार से बातचीत को हाथ बढ़ाया है। 18 अप्रैल को बादल ने जम्मू कश्मीर की कमान संभालने पर महबूबा को जहां मुबारकबाद दी, वहीं शाहपुर कंडी परियोजना के लटके काम पर भी ध्यान केंद्रित करवाया।
उन्होंने साफ किया है कि जम्मू कश्मीर सरकार को वाटर टर्मिनेशन एक्ट 2004 को लेकर जो गलतफहमी पैदा हुई थी, उसकी वजह से शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट के काम को साल 2014 में रुकवा दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री बादल ने इसे लेकर सफाई देते हुए यह भी लिखा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दायर किया गया है कि 1979 के पंजाब और जम्मू कश्मीर के रंजीत सागर समझौते का 2004 के वाटर टर्मिनेशन एक्ट से कोई नुकसान नहीं हुआ है। वर्ष 2015 में भी मुख्य सचिवों की बैठक हो चुकी है।
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सूत्रों ने बताया कि छह दिसंबर को जम्मू में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर घोषणा कर चुके थे कि अगली कैबिनेट में इसे लेकर फैसला ले लिया जाएगा।
उन्होंने परियोजना के पहलुओं में जम्मू कश्मीर के एक बड़े इलाके को होने वाले फायदा का भी हवाला दिया था, लेकिन उनके अकस्मात निधन से शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर चल रही कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने महबूबा मुफ्ती को लिखे पत्र में मुख्य सचिवों की बातचीत की शुरुआत करने की पहल जताई। उन्होंने कहा कि पंजाब जम्मू कश्मीर के हक को लेकर कहीं भी पीछे नहीं है।
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उन्होंने साफ किया है कि जम्मू कश्मीर सरकार को वाटर टर्मिनेशन एक्ट 2004 को लेकर जो गलतफहमी पैदा हुई थी, उसकी वजह से शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट के काम को साल 2014 में रुकवा दिया गया था।
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सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री बादल ने इसे लेकर सफाई देते हुए यह भी लिखा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दायर किया गया है कि 1979 के पंजाब और जम्मू कश्मीर के रंजीत सागर समझौते का 2004 के वाटर टर्मिनेशन एक्ट से कोई नुकसान नहीं हुआ है। वर्ष 2015 में भी मुख्य सचिवों की बैठक हो चुकी है।
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सूत्रों ने बताया कि छह दिसंबर को जम्मू में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर घोषणा कर चुके थे कि अगली कैबिनेट में इसे लेकर फैसला ले लिया जाएगा।
उन्होंने परियोजना के पहलुओं में जम्मू कश्मीर के एक बड़े इलाके को होने वाले फायदा का भी हवाला दिया था, लेकिन उनके अकस्मात निधन से शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर चल रही कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने महबूबा मुफ्ती को लिखे पत्र में मुख्य सचिवों की बातचीत की शुरुआत करने की पहल जताई। उन्होंने कहा कि पंजाब जम्मू कश्मीर के हक को लेकर कहीं भी पीछे नहीं है।
क्या है शाहपुर कंडी योजना
काफी समय से लटका है प्रोजेक्ट
- फोटो : Amar Ujala
फरवरी 2008 में शाहपुर कंडी योजना को केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय योजना घोषित किया। योजना आयोग ने इस परियोजना में 2285.81 क रोड़ की राशि को मंजूरी दी थी। इसमें सिंचाई के लिए 28.61 फीसदी और बिजली उत्पादन के लिए 71.39 फीसदी राशि को बांटा गया है।
वहीं राष्ट्रीय योजना की गाइड लाइन के अनुसार केंद्र सरकार सिंचाई घटक में नब्बे फीसदी निवेश करने, जबकि पंजाब सरकार द्वारा दस फीसदी निवेश किए जाने का भी प्रावधान है। पंजाब में शाहपुर कंडी परियोजना से जहां पांच हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का प्रावधान है, वहीं जम्मू कश्मीर में 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई को लेकर शाहपुर कंडी योजना में प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब सरकार 206 मेगावाट बिजली के उत्पादन को लेकर भी इस योजना को शुरू करने जा रही है।
जम्मू कश्मीर को क्या है लाभ
यूं तो रावी दरिया के पानी लखनपुर से विजयपुर तक 32 हजार सीसी से अधिक क्षेत्र की सिंचाई होती है। लेकिन जमीनी हकीकत में मात्र तीस फीसदी इलाके की सिंचाई ही इस पानी से संभव हो पाती है। ऐसे में शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट से जम्मू कश्मीर को अपने हिस्सा का पूरा पानी मिल पाएगा। इसके साथ ही रावी तवी सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गई डीपीआर के तहत कंडी इलाके में इस मुख्य नहर से बाइस लिफ्ट नहरें तैयार की जाएंगी। कंडी के इलाके में पानी की कमी को देखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला साबित हो सकता है, जिससे गर्मी में इलाके का जलस्तर भी बेहतर होने की संभावना है।
संयुक्त नियंत्रण के हक में राज्य
पंजाब सरकार के साथ पूर्व में हुए समझौते का अब तक खामियाजा भुगत रही जम्मू कश्मीर की सरकार रंजीत सागर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने को लेकर संयुक्त नियंत्रण चाहता है। अब तक पंजाब सरकार की मर्जी से ही जम्मू कश्मीर के खेतों को पानी मिल पाता है।
मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
रावी दरिया से जम्मू-कश्मीर को पानी मिलने पर कंडी सहित अन्य इलाकों में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे जहां इन इलाकों के तालाबों में पानी की समस्या हल हो सकती है, वहीं लोग बेहतर आय के लिए मछली पालन विभाग की योजनाओं का भी लाभ ले सकते हैं।
आज भी मदद की दरकार
रंजीत सागर बांध परियोजना से प्रभावित सैकड़ों परिवारों को आज भी बांध प्रबंधन और पंजाब सरकार से मदद की दरकार है। पंद्रह फीसदी रोजगार मुहैया करवाने के साथ ही जम्मू कश्मीर के प्रभावितों के पुनर्वास के लिए अनुबंध के तहत काम होना तय है।
इन शर्तों को मानने पर राजी है पंजाब सरकार
-हेडरेगुुलेटर का लेवल बराबर रखना, ताकि पंजाब और जम्मू की नहरों को एक समान लेवल से सिंचाई के लिए पानी हासिल हो सके। हालांकि पहले पंजाब और जम्मू कश्मीर के हेड रेगुलेटर में असमानता थी, जिसे बाद में सुधारने के लिए पंजाब सरकार राजी हो गई है।
-संयुक्त नियंत्रण को लेकर भी पंजाब सरकार ने हाथ बढ़ाया है। जम्मू कश्मीर चाहता है कि रंजीत सागर बांध समझौते के समय हुई गलती को न दोहराया जाए। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के हिस्से को मिलने वाले सिंचाई के पानी पर संयुक्त नियंत्रण की मांग रखी गई थी।
-पंजाब सरकार 2.3 किलोमीटर लंबी नहर बनाने को राजी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर को सिंचाई के लिए रावी दरिया से मिलने वाले पानी को लेकर पंजाब सरकार नहर जोड़ने को भी तैयार हो गई है।
-रोजगार सहित अन्य मांगों पर भी पंजाब सरकार ने जम्मू कश्मीर सरकार को अपनी मांगें रखने को कहा है।
वहीं राष्ट्रीय योजना की गाइड लाइन के अनुसार केंद्र सरकार सिंचाई घटक में नब्बे फीसदी निवेश करने, जबकि पंजाब सरकार द्वारा दस फीसदी निवेश किए जाने का भी प्रावधान है। पंजाब में शाहपुर कंडी परियोजना से जहां पांच हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का प्रावधान है, वहीं जम्मू कश्मीर में 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई को लेकर शाहपुर कंडी योजना में प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब सरकार 206 मेगावाट बिजली के उत्पादन को लेकर भी इस योजना को शुरू करने जा रही है।
जम्मू कश्मीर को क्या है लाभ
यूं तो रावी दरिया के पानी लखनपुर से विजयपुर तक 32 हजार सीसी से अधिक क्षेत्र की सिंचाई होती है। लेकिन जमीनी हकीकत में मात्र तीस फीसदी इलाके की सिंचाई ही इस पानी से संभव हो पाती है। ऐसे में शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट से जम्मू कश्मीर को अपने हिस्सा का पूरा पानी मिल पाएगा। इसके साथ ही रावी तवी सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गई डीपीआर के तहत कंडी इलाके में इस मुख्य नहर से बाइस लिफ्ट नहरें तैयार की जाएंगी। कंडी के इलाके में पानी की कमी को देखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला साबित हो सकता है, जिससे गर्मी में इलाके का जलस्तर भी बेहतर होने की संभावना है।
संयुक्त नियंत्रण के हक में राज्य
पंजाब सरकार के साथ पूर्व में हुए समझौते का अब तक खामियाजा भुगत रही जम्मू कश्मीर की सरकार रंजीत सागर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने को लेकर संयुक्त नियंत्रण चाहता है। अब तक पंजाब सरकार की मर्जी से ही जम्मू कश्मीर के खेतों को पानी मिल पाता है।
मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
रावी दरिया से जम्मू-कश्मीर को पानी मिलने पर कंडी सहित अन्य इलाकों में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे जहां इन इलाकों के तालाबों में पानी की समस्या हल हो सकती है, वहीं लोग बेहतर आय के लिए मछली पालन विभाग की योजनाओं का भी लाभ ले सकते हैं।
आज भी मदद की दरकार
रंजीत सागर बांध परियोजना से प्रभावित सैकड़ों परिवारों को आज भी बांध प्रबंधन और पंजाब सरकार से मदद की दरकार है। पंद्रह फीसदी रोजगार मुहैया करवाने के साथ ही जम्मू कश्मीर के प्रभावितों के पुनर्वास के लिए अनुबंध के तहत काम होना तय है।
इन शर्तों को मानने पर राजी है पंजाब सरकार
-हेडरेगुुलेटर का लेवल बराबर रखना, ताकि पंजाब और जम्मू की नहरों को एक समान लेवल से सिंचाई के लिए पानी हासिल हो सके। हालांकि पहले पंजाब और जम्मू कश्मीर के हेड रेगुलेटर में असमानता थी, जिसे बाद में सुधारने के लिए पंजाब सरकार राजी हो गई है।
-संयुक्त नियंत्रण को लेकर भी पंजाब सरकार ने हाथ बढ़ाया है। जम्मू कश्मीर चाहता है कि रंजीत सागर बांध समझौते के समय हुई गलती को न दोहराया जाए। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के हिस्से को मिलने वाले सिंचाई के पानी पर संयुक्त नियंत्रण की मांग रखी गई थी।
-पंजाब सरकार 2.3 किलोमीटर लंबी नहर बनाने को राजी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर को सिंचाई के लिए रावी दरिया से मिलने वाले पानी को लेकर पंजाब सरकार नहर जोड़ने को भी तैयार हो गई है।
-रोजगार सहित अन्य मांगों पर भी पंजाब सरकार ने जम्मू कश्मीर सरकार को अपनी मांगें रखने को कहा है।