जम्मू कश्मीर को थोड़ा मिला, थोड़े और की जरूरत थी
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पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले बजट से रियासत के लोगों को बहुत उम्मीदें थी। कुछ उम्मीदें पूरी भी हुईं लेकिन अभी भी बहुत कुछ है जिसकी दरकार रियासत के लोगों को है। आईआईटी मिलने से जहां आम लोगों में खुशी है, वहीं उद्यमियों में इस बात को लेकर निराशा है कि उद्योगों को मिलने वाले विशेष पैकेज को आगे नहीं बढ़ाया गया।
हालांकि खेलों को प्रोत्साहन और विस्थापित पंडितों के लिए विशेष फंड मुहैया करवाकर प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया है। इतना ही नहीं, लद्दाख में अल्ट्रा माडर्न सोलर प्रोजेक्ट और पश्मीना संवर्धन पी-3 के लिए फंड देकर बताया कि वह रियासत के हर वर्ग का ख्याल रख रही है।
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसीडेंट अनिल सूरी ने कहा कि यूपीए सरकार के समय विशेष पैकेज को आंशिक रूप से वापस ले लिया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि नई सरकार पैकेज वापस देकर उद्योगों को इंसेंटिव प्रदान करेगी। इससे उद्यमियों को मायूसी हाथ लगी है। इसके बावजूद रियासत को आईआईटी देने के फैसले का स्वागत करते हैं।
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट राकेश गुप्ता ने कहा कि युवाओं के लिए आईआईटी प्रदान कर वित्त मंत्री ने आम लोगों की भावनाओं को छुआ है। खासकर जम्मू-कश्मीर में खेलों के लिए दो सौ करोड़ रुपये प्रदान कर वित्त मंत्री ने युवा वर्ग को सही रास्ते में लाने का प्रयास किया है। खेलों में उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलने से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर परिणाम दे सकेंगे।
आयकर छूट कम मिलने से मायूसी
केंद्र सरकार का आम बजट सरकारी मुलाजिमों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। उनका कहना है कि आयकर छूट को ज्यादा बढ़ाया नहीं गया है। जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन के प्रधान सुशील सूदन का कहना है कि आम बजट से मुलाजिमों ने आयकर छूट में कम से कम चार लाख रुपये तक की उम्मीद लगाई थी।
लेकिन इसमें सिर्फ पचास हजार रुपये की ही बढ़ोतरी की गई है। फेडरेशन के महासचिव विनोद शर्मा का कहना है कि 80 सी में भी कर्मचारियों को ज्यादा राहत नहीं दी गई। इसमें कर्मचारी ज्यादा निवेश करके आयकर छूट का लाभ पा सकता है। आम बजट कर्मचारियों के हित में नहीं है। जीएमसी नर्सिंग एसोसिएशन की प्रधान मधु खजूरिया का कहना है कि टैक्स रिबेट में ज्यादा राहत नहीं दी गई है।
नान गजटेड इंप्लाइज यूनियन (आईएसएम) के प्रधान अशोक मगोत्रा का कहना है कि घर की रसोई के लिए आम बजट ठीक है। लेकिन कर्मचारियों के नजरिए से इसमें कुछ खास नहीं दिया गया है। आल डिपार्टमेंट ड्राइवर एंड क्लीनर फेडरेशन जम्मू (प्रोवियंस) के प्रधान अनूप सिंह जंबाल का कहना है कि कर्मचारियों को आयकर छूट में बढ़ावा दिया जाना चाहिए था। लेकिन मोदी सरकार से निराशा मिली है।
रियासत में खुशियां लाएगा बजट: जुगल
भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा है कि आम बजट से रियासत में खुशियां आएंगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जम्मू कश्मीर के हितों का खास ध्यान रखा है। इससे पहले कांग्रेस के शासनकाल में कभी भी पहले रियासत के सर्वंगीण विकास को ध्यान में नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि बजट में जम्मू के लोगों की मांगें पूरीं हुईं हैं।
उन्होंने बजट से पहले वित्त मंत्री से मुलाकात कर जम्मू में आईआईटी की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। बजट में इसके ऐलान से जम्मू के लोगों और खासकर युवकों में खासी खुशी है। इससे पहले कांग्रेस सरकार ने 67 साल में इस बारे में कभी नहीं सोचा। अब इंजीनियरिंग की बेहतर शिक्षा के लिए जम्मू के छात्रों को दरबदर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगीं।
इसके अलावा खेलों के विकास और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान कर खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए कदम उठाया गया है। कश्मीर के विस्थापित पंडितों के लिए 500 करोड़ और पश्मीना संवर्द्धन के लिए 50 करोड़ की व्यवस्था वादा निभाया गया है। लद्दाख के लिए सोलर पावर प्रोजेक्ट भी विकास को गति देगा।
आंखों में धूल झोंकने वाला बजट: मदनलाल
पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदनलाल शर्मा ने कहा है कि एनडीए सरकार का पहला बजट लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला है। जम्मू के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। फौजियों के लिए वन रैंक , वन पेंशन की घोषणा कांग्रेस की सरकार ने की थी। अब उसे ही बजट में फिर से स्थान देकर वाहवाही लूटने की कोशिश हो रही है।
जम्मू में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में आवाज बुलंद की थी। कश्मीर पंडितों के पुनर्वास कार्यक्रम कांग्रेस शासनकाल से ही चल रहे हैं और अबतक तीस हजार करोड़ से अधिक राशि इस पर खर्च की जा चुकी है। पश्मीना संवर्द्धन की योजना कांग्रेस शासनकाल की है।
चुनाव से पहले भाजपा ने महंगाई रोकने का सपना दिखाया था लेकिन बजट में इसके लिए कोई उपाय नहीं किया गया। बजट से पहले ही रेल किराया से लेकर जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए गए। आम जनता महंगाई के बोझ से दब गई है। जम्मू कश्मीर के लिए बजट में कोई नई बात नहीं है। रिफ्यूजियों के लिए बजट में कोई व्यवस्था नहीं किया गया और बार्डर एरिया के लोगों के साथ धोखा किया गया।
पूर्वोत्तर की तर्ज पर हो रियासत को फंडिंग: महबूबा
पीडीपी के अध्यक्ष महबूबू मुफ्ती और सांसद तारिक हमीद कर्रा ने बजट में जम्मू कश्मीर के लिए किए गए प्रावधानों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए भी नार्थ ईस्ट की तर्ज पर फंडिंग की जानी चाहिए। महबूबा ने कहा कि जम्मू में आईआईटी का स्वागत है लेकिन कश्मीर के लिए एक आईआईएम की स्थापना की जानी चाहिए।
जम्मू और कश्मीर संभाग में एआईआईएमएस की स्थापना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को सलाना 7800 करोड़ से अधिक नहीं मिलने वाला है जबकि नार्थ ईस्ट राज्यों को 53 हजार करोड़ मिल रहे हैं। इसे अलावा केंद्र में रियासत के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए ताकि समस्याएं निपटाई जा सके।
बार्डर एरिया विकास पर ध्यान जरूरी है। मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि आम बजट जम्मू कश्मीर के लिए उत्साहवर्द्धक नहीं है। नीतियों के मामले में बजट खामोश है। इससे रियासत की समस्याएं हल नहीं होंगीं। रोजगार कैसे बढे, इसके लिए बजट में कोई उपाय नहीं किया गया।