मसर्रत आलम पर फिर से पीएसए लगाने की तैयारी में मुफ्ती सरकार
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एक सप्ताह पहले पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) से बरी होने के बाद फिर गिरफ्तार किए गए घाटी के कट्टर अलगाववादी मसर्रत आलम पर फिर पीएसए लग सकता है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस प्रशासन उसका डोजियर बनाने में जुटी है, ताकि उस पर फिर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का मामला दर्ज किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि अदालत के आदेश पर मसर्रत को एक सितंबर को कोट भलवाल जेल से रिहा किया गया था। लेकिन रिहाई के बाद जेल के बाहर से ही सीआईडी विभाग ने पुराने मामले में हिरासत में ले लिया था।
मसर्रत के खिलाफ ज्वाइंट इंटेरोगेशन सेंटर पुलिस स्टेशन में 2012 से केस दर्ज था। पुलिस ने उसे अगले दिन कोर्ट में पेश कर एक सप्ताह के रिमांड पर लिया था, जिसकी अवधि आठ अगस्त को समाप्त हो जाएगी।
एक सितंबर को उसे रिहा किया गया था मसर्रत आलम
बताया जाता है कि रिमांड के दौरान मसर्रत से कड़ी पूछताछ की गई और उसका डोजियर तैयार किया जा रहा है। पाकिस्तानी झंडे लहराने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण 17 अप्रैल को उसे गिरफ्तार किया गया था और उस पर पीएसए लगाया गया था। उसके बाद उसे कश्मीर घाटी से कोट भलवाल जेल भेज दिया गया था।
हाईकोर्ट ने उसे पीएसए के तहत न्यायिक हिरासत में रखने को अवैध करार दिया था और सरकार को उसे रिहा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद एक सितंबर को उसे रिहा किया गया था। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का करीबी माने जाने वाला मसर्रत घाटी में हिंसक आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है और उसे कई बार गिरफ्तार किया गया है।
नौ मार्च को रियासत में नई गठबंधन सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती ने मसर्रत की रिहाई के आदेश दिए थे। इसके बाद काफी विवाद हुआ था। विपक्षी राजनीतिक दलों ने उनके फैसले की कड़ी आलोचना की थी। संसद में भी यह मामला उठा था।