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सेरी कल्चर विभाग के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन
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वन विभाग की ओर से एक बीट गार्ड एक गांव के अंर्तगत कार्यक्रमों को आयोजन किया गया
- फोटो : RAJOURI
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सुंदरबनी। कोकून खरीद मंडी में फसल का दाम कम मिलने के पर किसानों ने सेरी कल्चर विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने आरोप लगाया कि सेरी कल्चर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ठेकेदारों के साथ मिलीभगत होने के कारण उन्हें ठेकेदार कोकून के दाम कम दे रहे हैं।
किसानों अशोक कुमार, पूर्ण चंद, जसवीर सिंह, सुरेश कुमार, तेज राम, कमल लाल, ओम प्रकाश, आदि ने कहा कि विभाग की तरफ से कोकून का सरकारी दाम सिर्फ 550 रुपये रखा गया है। जबकि, बाहरी राज्यों से आए निजी ठेकेदार उन्हें अच्छे दाम देते रहे हैं। इस बार विभाग के अधिकारियों की ठेकेदारों के साथ मिलीभगत के चलते उन्हें ठेकेदार भी कम दाम दे रहे हैं। इस कारण मजबूर होकर उन्हें कोकून बेचना बंद करना पड़ रहा है।
किसानों ने कोकून मंडी को बंद कराकर विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि अगर उन्हें कोकून के सही दाम नहीं मिले तो वह कोकून नहीं बेचेंगे। इसी बीच सेरी कल्चर विभाग के उपनिदेशक जयपाल सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने कोकून उत्पादक किसानों और ठेकेदारों के बीच बातचीत कराकर फिर से मंडी शुरू कराई और किसानों को अच्छे दाम मिलना शुरू हुए। इसमें किसानों को अच्छे कोकून के साढे़ नौ सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम मिले, जबकि सरकारी मूल्य साढे़ पांच सौ रुपये है।
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किसानों अशोक कुमार, पूर्ण चंद, जसवीर सिंह, सुरेश कुमार, तेज राम, कमल लाल, ओम प्रकाश, आदि ने कहा कि विभाग की तरफ से कोकून का सरकारी दाम सिर्फ 550 रुपये रखा गया है। जबकि, बाहरी राज्यों से आए निजी ठेकेदार उन्हें अच्छे दाम देते रहे हैं। इस बार विभाग के अधिकारियों की ठेकेदारों के साथ मिलीभगत के चलते उन्हें ठेकेदार भी कम दाम दे रहे हैं। इस कारण मजबूर होकर उन्हें कोकून बेचना बंद करना पड़ रहा है।
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किसानों ने कोकून मंडी को बंद कराकर विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि अगर उन्हें कोकून के सही दाम नहीं मिले तो वह कोकून नहीं बेचेंगे। इसी बीच सेरी कल्चर विभाग के उपनिदेशक जयपाल सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने कोकून उत्पादक किसानों और ठेकेदारों के बीच बातचीत कराकर फिर से मंडी शुरू कराई और किसानों को अच्छे दाम मिलना शुरू हुए। इसमें किसानों को अच्छे कोकून के साढे़ नौ सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम मिले, जबकि सरकारी मूल्य साढे़ पांच सौ रुपये है।
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