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एमएसजीएस में मन्हास बिरादरी का प्रदर्शन

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protest
जम्मू। शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में वीरवार को मन्हास बिरादरी के सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उनका एक सदस्य अपने बच्चे को उपचार के लिए बुधवार की रात एसएमजीएस अस्पताल में लाया, लेकिन डाक्टर ने उसे देखने के बजाय उसकी फाइल को फेंक दिया और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा। डाक्टर के ऐसे रवैये से परिवार वाले काफी दुखी हैं। बच्चा गंभीर हालत में था। बिरादरी के सदस्यों ने डाक्टर के अभद्र रवैये खिलाफ रोष जताया।
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जम्मू में वीरवार को मन्हास बिरादरी की मेल का आयोजन किया गया था। इस बीच उन्हें जानकारी दी गई कि बिरादरी के एक सदस्य के साथ एसएमजीएस में डाक्टर ने अभद्र व्यवहार किया है। इसके बाद बिरादरी के सदस्यों ने एसएमजीएस में पहुंचकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल गरीब लोगों को चिकित्सा देने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन डाक्टरों के रवैये से लोग परेशान हैं। खासतौर पर रात्रि ड्यूटी के दौरान अस्पतालों में कोई वरिष्ठ डाक्टर उपलब्ध नहीं होते हैं और जूनियर डाक्टरों के सहारे ही अस्पताल चल रहे हैं। जूनियर डाक्टरों में किसी तरह से संयम नहीं है और वे तीमारदारों से भिड़ रहे हैं। अखनूर से बच्चा लेकर आए अभिभावक ने आरोप लगाया कि बीती रात उनका बच्चा तेज बुखार के कारण बेहोशी की हालत में था। जब वह एसएमजीएस के इमरजेंसी वार्ड 18 में पहुंचे तो डाक्टर ने उसे देखने के बजाय उसकी फाइल फेंक दी और उसे बाहर जाने को कहा, इससे वह काफी निराश हुए। सरपंच सुखदेव सिंह मन्हास ने कहा कि रात्रि ड्यूटी के दौरान अधिकतर डाक्टर सोने का काम कर रहे हैं और जब उन्हें काम करना पड़ता है तो आपा खो रहे हैं। अस्पताल में मरीज के साथ जब कोई तीमारदार आता है तो वे तनाव में होता है, ऐसे में डाक्टरों का कर्तव्य बनता है कि वे सरल और संयम के साथ उनसे बात करें। उन्होंने आरोप लगाया कि डाक्टरों के ऐसे रवैये के खिलाफ आवाज उठाने पर तीमारदारों पर एफआईआर लगाने को धमकाया जाता है। बाद में अस्पताल प्रशासन ने बिरादरी के सदस्यों और संबंधित तीमारदारों के साथ बात करके मामला सुलझा लिया। बच्चे का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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तीमारदारों को गलतफहमी हुई: अधीक्षक
एसएमजीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर दारा सिंह ने बताया कि बच्चे की फाइल फेंकने के मामले में तीमारदार को गलतफहमी हुई थी। दरअसल उस समय इमरजेंसी में उक्त डॉक्टर एक गंभीर मरीज को देख रहा था। लेकिन तीमारदार उस बच्चे को पहले देखने की बात कर रहे थे। डॉक्टर ने फाइल काउंटर पर रखकर बच्चे के साथ आए अतिरिक्त सदस्यों को बाहर इंतजार करने को कहा, जिसके बाद तीमारदार भड़क गए। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को पहले प्राथमिकता पर देखा जाता है। दोनों पक्षों में मामला सुलझा लिया गया है।
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