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वेतन न मिलने पर प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ
Updated Tue, 20 Jan 2015 01:06 PM IST
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एसएसए के तहत नियुक्त प्रेरक सोमवार को भड़क गए और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित होकर प्रेरकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे संजीव पंगोत्रा ने कहा कि एक वर्ष से उन्हें नियुक्ति किया गया है लेकिन न तो कोई काम बताया जाता है और न ही वेतन दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि हमारी परेशानी यह है कि एक वर्ष से काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है जिसके कारण हम बेकार महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में भी प्रेरक नियुक्त किए गए थे, लेकिन उनको वेतन मिल रहा है, जबकि हम वेतन से पूरी तरह से वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि इस संबंध में उचित कदम उठाए जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि विभाग को प्रेरकों से काम नहीं लेना था तो नियुक्त ही क्यों किया गया? सरकार योजनाएं तो बनाती है लेकिन यह योजनाएं सही ढंग से लागू नहीं होतीं।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल सुनील तनेजा ने कहा कि यदि प्रशासन ने हमारी सुध नहीं ली तो मजबूर होकर आंदोलन करना पडे़गा।
विभाग को चाहिए कि इस मिशन के तहत हमारे कार्य बताए हमसे काम लें और हमें इसके बदले में वेतन दें। यदि विभाग ने जल्द ही उचित कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को तेज करते हुए सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे संजीव पंगोत्रा ने कहा कि एक वर्ष से उन्हें नियुक्ति किया गया है लेकिन न तो कोई काम बताया जाता है और न ही वेतन दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि हमारी परेशानी यह है कि एक वर्ष से काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है जिसके कारण हम बेकार महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में भी प्रेरक नियुक्त किए गए थे, लेकिन उनको वेतन मिल रहा है, जबकि हम वेतन से पूरी तरह से वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि इस संबंध में उचित कदम उठाए जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि विभाग को प्रेरकों से काम नहीं लेना था तो नियुक्त ही क्यों किया गया? सरकार योजनाएं तो बनाती है लेकिन यह योजनाएं सही ढंग से लागू नहीं होतीं।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल सुनील तनेजा ने कहा कि यदि प्रशासन ने हमारी सुध नहीं ली तो मजबूर होकर आंदोलन करना पडे़गा।
विभाग को चाहिए कि इस मिशन के तहत हमारे कार्य बताए हमसे काम लें और हमें इसके बदले में वेतन दें। यदि विभाग ने जल्द ही उचित कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को तेज करते हुए सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।