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क्षमता से ज्यादा कैदी होने पर नई जेल का प्रस्ताव
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 29 May 2016 10:55 AM IST
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जेल
- फोटो : Demo Pic.
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जम्मू कश्मीर की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के कारण प्रशासन को असुविधा हो रही है। इस समय रियासत की 14 जेलों में करीब 2500 कैदी रखे गए हैं। कैदियों की संख्या ज्यादा होने से जेल प्रशासन ने उनको अलग-अलग जेलों में भेजने की कवायद शुरू की है।
सामान्य अपराधी और आतंकियों केे बीच बढ़ते संबंधों के कारण अधिकतर कैदियों को शिफ्ट करने के अलावा घाटी में नई जेल बनाए जाने का भी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी जेल कोट भलवाल सेंट्रल जेल है। यहां पांच सौ कैदियों के रहने की व्यवस्था है। फिलहाल इस जेेल में कश्मीर से पकड़े गए आतंकियों व अलगाववादियों को रखा गया है। जबकि कश्मीर की श्रीनगर, बडगाम, अनंतनाग जेल में पथराव करने वाले युवाओं को रखा गया है।
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श्रीनगर जेल में 300, बडगाम में 200 और अनंतनाग जेल में भी 200 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेह, कठुआ, उधमपुर, रियासी जेल में 200-250 कैदियों के रखने क्षमता है। इन जेलों में भी क्षमता से अधिक कैदी हैं। हीरानगर जेल में 450 कैदियों की व्यवस्था है। जम्मू संभाग की जेलों में पथराव करने वाला एक भी कैदी मौजूद नहीं है।
आतंकी, ओवरग्राउंड वर्कर औैर अलगाववादी नेेताओं को इन जेलों में रखा गया है। कोट भलवाल औैर हीरानगर में आतंकियों की संख्या अधिक है, जहां आतंकी कई बार हंगामा भी कर चुके है। जेल तोड़ने के प्रयास भी हुए। सुरक्षा कारणों से कई बार इन कैदियों को कोर्ट में भी पेश नहीं किया जाता है।
जिसके कारण संबंधित जिला जेल में ही कैदियों को शिफ्ट करने की कवायद शुरू की गई। किश्तवाड़ और लेह में दो नई जेल भी तैयार की गई। डोडा, रामबन, भद्रवाह व अनंतनाग के कुछ कैदियों को इन जेलों में शिफ्ट किया गया। इन जेलों की क्षमता भी 100 कैदियों की ही है।
जबकि इनमें भी क्षमता से अधिक कैदी हैं। श्रीनगर में सबसे अधिक बवाल हुआ। सामान्य अपराधियों के बीच आतंकियों के ठहराए जाने से कई युवा अपराधियों को आतंकवाद के लिए तैयार किया जा रहा है।
डीजीपी जेल डॉ. एसपी वेद का कहना है कि श्रीनगर के लिए एक अतिरिक्त जेल के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि आतंकी व सामान्य कैदी अलग-अलग रहें। हर जिले में जेल नहीं है और कई कैदियों को सेंट्रल जेल में भेजा गया है। प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है कि क्षमता से अधिक कैदी जेलों में नहीं रहें और उन्हें शिफ्ट किया जाए।
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सामान्य अपराधी और आतंकियों केे बीच बढ़ते संबंधों के कारण अधिकतर कैदियों को शिफ्ट करने के अलावा घाटी में नई जेल बनाए जाने का भी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
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जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी जेल कोट भलवाल सेंट्रल जेल है। यहां पांच सौ कैदियों के रहने की व्यवस्था है। फिलहाल इस जेेल में कश्मीर से पकड़े गए आतंकियों व अलगाववादियों को रखा गया है। जबकि कश्मीर की श्रीनगर, बडगाम, अनंतनाग जेल में पथराव करने वाले युवाओं को रखा गया है।
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श्रीनगर जेल में 300, बडगाम में 200 और अनंतनाग जेल में भी 200 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेह, कठुआ, उधमपुर, रियासी जेल में 200-250 कैदियों के रखने क्षमता है। इन जेलों में भी क्षमता से अधिक कैदी हैं। हीरानगर जेल में 450 कैदियों की व्यवस्था है। जम्मू संभाग की जेलों में पथराव करने वाला एक भी कैदी मौजूद नहीं है।
आतंकी, ओवरग्राउंड वर्कर औैर अलगाववादी नेेताओं को इन जेलों में रखा गया है। कोट भलवाल औैर हीरानगर में आतंकियों की संख्या अधिक है, जहां आतंकी कई बार हंगामा भी कर चुके है। जेल तोड़ने के प्रयास भी हुए। सुरक्षा कारणों से कई बार इन कैदियों को कोर्ट में भी पेश नहीं किया जाता है।
जिसके कारण संबंधित जिला जेल में ही कैदियों को शिफ्ट करने की कवायद शुरू की गई। किश्तवाड़ और लेह में दो नई जेल भी तैयार की गई। डोडा, रामबन, भद्रवाह व अनंतनाग के कुछ कैदियों को इन जेलों में शिफ्ट किया गया। इन जेलों की क्षमता भी 100 कैदियों की ही है।
जबकि इनमें भी क्षमता से अधिक कैदी हैं। श्रीनगर में सबसे अधिक बवाल हुआ। सामान्य अपराधियों के बीच आतंकियों के ठहराए जाने से कई युवा अपराधियों को आतंकवाद के लिए तैयार किया जा रहा है।
डीजीपी जेल डॉ. एसपी वेद का कहना है कि श्रीनगर के लिए एक अतिरिक्त जेल के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि आतंकी व सामान्य कैदी अलग-अलग रहें। हर जिले में जेल नहीं है और कई कैदियों को सेंट्रल जेल में भेजा गया है। प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है कि क्षमता से अधिक कैदी जेलों में नहीं रहें और उन्हें शिफ्ट किया जाए।