शोध में खुलासा: जम्मू संभाग के चार जिलों में पानी की गुणवत्ता बिगड़ी, ज्यादा फ्लोराइड से दंत रोग, नाइट्रेट से ब्लू बेबी सिंड्रोम
शोध के अनुसार उधमपुर की बिल्लन और दुधारी बावली में नाइट्रेट अधिक मात्रा में पाया गया है। नाड़ बावली, गैड़ा तालाब, गोल मेला हैंडपंप, देविका घाट और पुलिस लाइन की बावली में 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड कंटेंट मिला है।
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जम्मू संभाग के सांबा, कठुआ, उधमपुर और डोडा जिले के पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट, कैल्शियम, बाय कार्बोनेट की मात्रा ज्यादा पाई गई है। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के दो साल के शोध में यह खुलासा हुआ है। चारों जिलों में बावली, हैंडपंप समेत पेयजल के अन्य स्रोतों से सैंपल लिए गए थे जिसमें पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई। शोधकर्ताओं ने खेतों में यूरिया के ज्यादा इस्तेमाल से लेकर अन्य कारण गिनाए हैं, जिसके लिए संबंधित क्षेत्रों में सामुदायिक आरओ स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
शोध के अनुसार उधमपुर की बिल्लन और दुधारी बावली में नाइट्रेट अधिक मात्रा में पाया गया है। नाड़ बावली, गैड़ा तालाब, गोल मेला हैंडपंप, देविका घाट और पुलिस लाइन की बावली में 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड कंटेंट मिला है। डोडा के ठाठरी, प्राणू, द्रोडू और काबी क्षेत्र की कुछ बावलियों में भी फ्लोराइड ज्यादा मिला है।
सांबा में कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा बढ़ रही है। वहीं, कठुआ जिले में नाइट्रेट की समस्या है। 45 मिली ग्राम से ज्यादा नाइट्रेट जिस क्षेत्र के पानी में पाया जाता है। वह पीने, बर्तन धोने और नहाने लायक भी नहीं होता। इसे ट्रीट करने के जरूरत पड़ती है। खेतों में यूरिया का प्रयोग करने से पानी की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। पंचायत स्तर और ग्राम स्तर पर पानी को ट्रीट करने के लिए सामुदायिक स्तर पर आरो सिस्टम लगाने की जरूरत है।
ज्यादा फ्लोराइड से दंत रोग, नाइट्रेट से ब्लू बेबी सिंड्रोम
पानी में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित स्तर से ज्यादा होने पर इसका सेवन करने वाले के दांत पीले पड़ने लगते हैं। कैल्शियम कारबोनेट की मात्रा अधिक होने पर शरीर में पथरी बनने लगती है। इसी तरह से नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा होने पर ब्लू बेडी सिंड्रोम की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में नवजात का शरीर पीला पड़ने लगता है।
20 छात्रों ने जुटाए सैंपल
एमएससी छात्रों ने अलग-अलग क्षेत्रों से जुटाए पानी के सैंपल केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के पर्यावरण विभाग के बीस छात्रों ने दो साल में डोडा, उधमपुर, कठुआ और सांबा से पानी के सैंपल जुटाए। इनकी जांच डॉ. पंकज मेहता ने की है।
पथरी, दंतरोग, ब्लू बेबी सिंड्रोम जैसी बीमारियों से बचाने के लिए सरकार को प्रभावित इलाकों में पानी ट्रीट करवाना होगा। पानी में औषधियां डालनी होंगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर कम्यूनिटी आरओ सिस्टम लगाने होंगे। पानी की वैज्ञानिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। लोगाें को भी जागरूक करना होगा।- डॉ. पंकज मेहता, सहायक प्रोफेसर, पर्यावरण विभाग केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू
फ्लोराइड कंटेंट ज्यादा होने से दांत पीले पड़ जाते हैं। जब फ्लोराइट कंटेंट वन पार्ट पर मिलियन से ज्यादा होता है। तब इस बीमारी का खतरा रहता है।- डॉ. राकेश गुप्ता, प्रिंसिपल डेंटल कॉलेज जम्मू