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नगर परिषद का दायरा तो बढ़ा, सुविधाएं नहीं
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सांबा। नगर परिषद का दायरा तो बढ़ाया गया है, लेकिन सुविधाएं नाममात्र ही हैं। कस्बे में पहले 13 वार्ड थे। जब सांबा जिला बना तो नगर पालिका को नगर परिषद के लिए दायरा बढ़ाया गया। इसमें कस्बे की मंडियों को भी शामिल किया गया और 17 वार्ड बनाए गए।
दायरा तो बढ़ाया गया, लेकिन आज भी लोगों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। वार्ड-15 के पार्षद राज सिंह ने बताया कि जब परिषद के लिए हदबंदी शुरू की गई तो उसमें भी लोगों व पंचायत प्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया। वार्ड की हदबंदी भी सही तरीके से नहीं की गई। एक पंचायत को तीन क्षेत्रों में बांट दिया गया। एक वार्ड को पंचायत के साथ जोड़ा, किसी वार्ड को अन्य वार्ड के साथ जोड़ा गया। वहीं विकास के नाम पर भी तीन साल में उन्हें छह लाख फंड उपलब्ध हुए। इनमें माई टाउन माई प्राइड योजना के छह लाख के फंड मिले। ऐसे में उनकी वार्ड में बीस गलियां हैं। ऐसे में उनका विकास करना असंभव है।
वार्ड-17 के पार्षद महेश्वर राज ने बताया कि वार्ड में विकास के साथ सफाई की बुरी हालत है। सफाई कर्मियों के नहीं पहुंचने से सफाई नहीं हो पा रही है। यदि उनकी वार्ड में कोई विवाह कार्यक्रम हो तो सफाई के लिए कर्मचारियों की परेशानी रहती है। वार्ड-16 के पार्षद उत्तम चंद के अनुसार नगर परिषद का दायरा तो बढ़ाया गया लेकिन लोगों को सुविधाएं न के बराबर हैं। पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। पहले लोग पानी का किराया साल में 940 रुपये थ। अब नगर परिषद को 2800 रुपये अदा किया जा रहा है, लेकिन पानी सुविधा पहले से भी बदतर है। पानी की आपूर्ति में सुधार नहीं हो पाया है।
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वार्ड-15 का मोहल्ला जुलाका में मार्ग तक की सुविधा नहीं है। लोग नाले से गुजर कर गंतव्य को जाते हैं। इस बाबत लोगों ने कई बार नगर परिषद का दरवाजा खटखटाया, लेकिन आज तक मार्ग ही नहीं उपलब्ध हो पाया है।
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वार्ड-15 गढ़ मंडी में पानी की समस्या बनी है। ट्यूबवेल की मोटर जल जाने से मंडी गढ़ में टैंकर नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी बनी रहती है। वैसे भी तीन से पांच दिन बाद पानी की आपूर्ति मिल रही है।
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नगर परिषद को 2011 की जनसंख्या के हिसाब से फंड उपलब्ध हो रहे हैं। उस समय नगर पालिका की जनसंख्या 11 हजार 700 थी। परिषद का दायरा बढ़ने पर नए वार्डों की जनसंख्या 26000 हो गई। इसमें बाहरी लोगों के रहने से 45 हजार जनसंख्या है। ऐसे में 17 वार्डों के लिए सौ सफाई कर्मचारी की जरूरत है। जबकि नगर परिषद के पास कुल 25 कर्मचारी ही हैं। फिर भी विकास कार्यों के साथ सफाई हर रोज कराई जा रही है।
-पवन कोहली, अध्यक्ष नगर परिषद, सांबा
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दायरा तो बढ़ाया गया, लेकिन आज भी लोगों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। वार्ड-15 के पार्षद राज सिंह ने बताया कि जब परिषद के लिए हदबंदी शुरू की गई तो उसमें भी लोगों व पंचायत प्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया। वार्ड की हदबंदी भी सही तरीके से नहीं की गई। एक पंचायत को तीन क्षेत्रों में बांट दिया गया। एक वार्ड को पंचायत के साथ जोड़ा, किसी वार्ड को अन्य वार्ड के साथ जोड़ा गया। वहीं विकास के नाम पर भी तीन साल में उन्हें छह लाख फंड उपलब्ध हुए। इनमें माई टाउन माई प्राइड योजना के छह लाख के फंड मिले। ऐसे में उनकी वार्ड में बीस गलियां हैं। ऐसे में उनका विकास करना असंभव है।
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वार्ड-17 के पार्षद महेश्वर राज ने बताया कि वार्ड में विकास के साथ सफाई की बुरी हालत है। सफाई कर्मियों के नहीं पहुंचने से सफाई नहीं हो पा रही है। यदि उनकी वार्ड में कोई विवाह कार्यक्रम हो तो सफाई के लिए कर्मचारियों की परेशानी रहती है। वार्ड-16 के पार्षद उत्तम चंद के अनुसार नगर परिषद का दायरा तो बढ़ाया गया लेकिन लोगों को सुविधाएं न के बराबर हैं। पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। पहले लोग पानी का किराया साल में 940 रुपये थ। अब नगर परिषद को 2800 रुपये अदा किया जा रहा है, लेकिन पानी सुविधा पहले से भी बदतर है। पानी की आपूर्ति में सुधार नहीं हो पाया है।
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वार्ड-15 का मोहल्ला जुलाका में मार्ग तक की सुविधा नहीं है। लोग नाले से गुजर कर गंतव्य को जाते हैं। इस बाबत लोगों ने कई बार नगर परिषद का दरवाजा खटखटाया, लेकिन आज तक मार्ग ही नहीं उपलब्ध हो पाया है।
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वार्ड-15 गढ़ मंडी में पानी की समस्या बनी है। ट्यूबवेल की मोटर जल जाने से मंडी गढ़ में टैंकर नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी बनी रहती है। वैसे भी तीन से पांच दिन बाद पानी की आपूर्ति मिल रही है।
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नगर परिषद को 2011 की जनसंख्या के हिसाब से फंड उपलब्ध हो रहे हैं। उस समय नगर पालिका की जनसंख्या 11 हजार 700 थी। परिषद का दायरा बढ़ने पर नए वार्डों की जनसंख्या 26000 हो गई। इसमें बाहरी लोगों के रहने से 45 हजार जनसंख्या है। ऐसे में 17 वार्डों के लिए सौ सफाई कर्मचारी की जरूरत है। जबकि नगर परिषद के पास कुल 25 कर्मचारी ही हैं। फिर भी विकास कार्यों के साथ सफाई हर रोज कराई जा रही है।
-पवन कोहली, अध्यक्ष नगर परिषद, सांबा