{"_id":"614794798ebc3ec5ed0af0f1","slug":"problem-parking-super-speciality-hospital-jammu-news-jammu-news-jmu2440092127","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुपर स्पेशियलिटी की पार्किंग बंद, मरीज-तीमारदार बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुपर स्पेशियलिटी की पार्किंग बंद, मरीज-तीमारदार बेहाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। सरकारी अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों को बुनियादी सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू की पार्किंग बंद कर दी गई है। इससे मरीजों को लेकर आ रहे निजी वाहन सड़क पर खड़े करने पड़ रहे हैं। हालत यह है कि अस्पताल के बाहर सड़क पर थ्री लेयर तक वाहनों की कतारें लग रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने अपनी पार्किंग सिर्फ स्टाफ के लिए सुनिश्चित कर दी है। अस्पताल के भीतर मरीजों और तीमारदारों को कोई पार्किंग नहीं दी गई है। हालांकि इससे पहले अस्पताल की पार्किंग और अस्पताल परिसर में तीमारदारों के वाहन खड़े रहते थे। सड़क पर खड़े वाहनों को ट्रैफिक पुलिस वाले भी उठा रहे हैं, जिससे तीमारदारों की परेशानी और बढ़ गई है।
अस्पताल की तीन मंजिला पार्किंग में सैकड़ों वाहनों को खड़ा करने की क्षमता है। इस पार्किंग में अब अस्पताल स्टाफ के वाहनों को ही खड़ा किया जा रहा है। अस्पताल परिसर के भीतर भी सभी बाहरी वाहनों को हटा दिया गया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों और तीमारदारों के लिए दूसरा कोई पार्किंग का विकल्प नहीं दिया है। इस अस्पताल तक पहुंचने के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी नहीं है। बीसी रोड और महेशपुरा चौक से ही मेटाडोर निकलती हैं, जबकि अस्पताल दोनों के बीच स्थापित है। अस्पताल के मुख्य गेट के सामने भी वाहनों को लगाने से मनाही है। सुपर स्पेशियलिटी होने से यहां रोजाना न्यूरोसर्जरी, नेफरोलॉजी (किडनी), यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सीटीबीएस प्रमुख यूनिटों में दर्जनों ऑपरेशन के साथ सैकड़ों मरीजों की ओपीडी हो रही है, जिसमें सामान्य तौर पर एक मरीज के साथ एक या दो तीमारदार होते हैं और अधिकांश गंभीर होते हैं। लेकिन पार्किंग के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं होने से तीमारदारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इस व्यवस्था से अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों और आम लोगों में कहासुनी भी बढ़ी है।
------
अस्पताल परिसर में वाहनों के खड़े रहने से जगह नहीं मिल पाती, जिससे वाहन बाहर किए गए हैं। अस्पताल की अपनी पार्किंग का निर्माण चार फ्लोर तक होना है, लेकिन अभी एक ही फ्लोर बना है। तीमारदार अपने मरीज को भीतर छोड़कर बाहर वाहन लगा सकते हैं।
विज्ञापन
- डॉ. मनोज चलोत्रा, अधीक्षक
विज्ञापन
अस्पताल की तीन मंजिला पार्किंग में सैकड़ों वाहनों को खड़ा करने की क्षमता है। इस पार्किंग में अब अस्पताल स्टाफ के वाहनों को ही खड़ा किया जा रहा है। अस्पताल परिसर के भीतर भी सभी बाहरी वाहनों को हटा दिया गया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों और तीमारदारों के लिए दूसरा कोई पार्किंग का विकल्प नहीं दिया है। इस अस्पताल तक पहुंचने के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी नहीं है। बीसी रोड और महेशपुरा चौक से ही मेटाडोर निकलती हैं, जबकि अस्पताल दोनों के बीच स्थापित है। अस्पताल के मुख्य गेट के सामने भी वाहनों को लगाने से मनाही है। सुपर स्पेशियलिटी होने से यहां रोजाना न्यूरोसर्जरी, नेफरोलॉजी (किडनी), यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सीटीबीएस प्रमुख यूनिटों में दर्जनों ऑपरेशन के साथ सैकड़ों मरीजों की ओपीडी हो रही है, जिसमें सामान्य तौर पर एक मरीज के साथ एक या दो तीमारदार होते हैं और अधिकांश गंभीर होते हैं। लेकिन पार्किंग के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं होने से तीमारदारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इस व्यवस्था से अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों और आम लोगों में कहासुनी भी बढ़ी है।
विज्ञापन
------
अस्पताल परिसर में वाहनों के खड़े रहने से जगह नहीं मिल पाती, जिससे वाहन बाहर किए गए हैं। अस्पताल की अपनी पार्किंग का निर्माण चार फ्लोर तक होना है, लेकिन अभी एक ही फ्लोर बना है। तीमारदार अपने मरीज को भीतर छोड़कर बाहर वाहन लगा सकते हैं।
विज्ञापन
- डॉ. मनोज चलोत्रा, अधीक्षक