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कश्मीर मसले पर राष्ट्रपति से मिले विपक्ष के नेता, दखल की गुहार
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 10:15 PM IST
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राष्ट्रपति से मुलाकात करते विपक्षी दल के नेता
- फोटो : PTI
जम्मू-कश्मीर में पिछले 43 दिनों से बरकरार अस्थिरता का कोई राजनीतिक हल नहीं निकलने से हताश विपक्षी दलों के 20 सदस्यों ने राष्ट्रपति के दरबार में दस्तक दी है।
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में राज्य के विपक्षी नेताओं ने शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर अपील की है कि वह केंद्र सरकार से कश्मीर के संकट का प्रशासनिक हल के बजाय राजनीतिक समाधान ढूंढने को कहें।
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कश्मीर घाटी में शांति बहाली का कोई संकेत नहीं मिलता देख उमर ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार कश्मीर के राजनीतिक मिजाज को समझने में विफल रही है। विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल का मानना था कि राज्य का मुद्दा राजनीतिक प्रकृति का है। उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें राज्य की बदतर होती स्थिति से अवगत कराया और इस मामले में उनसे हस्तक्षेप की मांग की।
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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज से जांच कराने की मांग
बैठक में मौजूद विपक्षी दल के नेता
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा, ‘सभी सदस्यों ने राष्ट्रपति से राज्य और केंद्र में अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की ताकि घाटी की जनता पर सेना के अत्याचार को रोका जा सके। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बल के अत्याचार की जांच सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज से कराई जाए। केंद्र सरकार एक राजनीतिक समस्या का समाधान प्रशासनिक कदम उठा कर रही है।’
राष्ट्रपति से एक घंटे की मुलाकात के बाद उमर ने पत्रकारों से कहा, ‘केंद्र सरकार यह समझने में विफल रही कि कश्मीर की समस्या दरअसल राजनीतिक प्रकृति की है और केंद्र की इसी नाकामी से घाटी के बिगड़ते हालात और बदतर हो गए हैं।
हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार पर बिना देर किए राजनीतिक वार्ता की एक भरोसेमंद और सार्थक प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहें जिसमें राज्य की राजनीतिक समस्या के हल के लिए सभी पक्षों की राय ली जाए। सेना के उत्तरी कमान ने भी कहा है कि कश्मीर के हर तबके से बातचीत की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। जो काम केंद्र नहीं कर पा रहा है उसकी मांग सेना भी कर रही है।’
पूर्व मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जी ए मीर के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक, माकपा विधायक एम वाई तरिगामी और निर्दलीय विधायक हाकिम यासीन भी थे। उमर ने कहा, ‘कश्मीर घाटी में 42 दिन से सुलग रही आग पहले ही पीर पंजाल समेत जम्मू क्षेत्र की चिनाब घाटी और कारगिल तक फैलनी शुरू हो चुकी है।
राष्ट्रपति से एक घंटे की मुलाकात के बाद उमर ने पत्रकारों से कहा, ‘केंद्र सरकार यह समझने में विफल रही कि कश्मीर की समस्या दरअसल राजनीतिक प्रकृति की है और केंद्र की इसी नाकामी से घाटी के बिगड़ते हालात और बदतर हो गए हैं।
हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार पर बिना देर किए राजनीतिक वार्ता की एक भरोसेमंद और सार्थक प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहें जिसमें राज्य की राजनीतिक समस्या के हल के लिए सभी पक्षों की राय ली जाए। सेना के उत्तरी कमान ने भी कहा है कि कश्मीर के हर तबके से बातचीत की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। जो काम केंद्र नहीं कर पा रहा है उसकी मांग सेना भी कर रही है।’
पूर्व मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जी ए मीर के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक, माकपा विधायक एम वाई तरिगामी और निर्दलीय विधायक हाकिम यासीन भी थे। उमर ने कहा, ‘कश्मीर घाटी में 42 दिन से सुलग रही आग पहले ही पीर पंजाल समेत जम्मू क्षेत्र की चिनाब घाटी और कारगिल तक फैलनी शुरू हो चुकी है।