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आईसीयू चलाने में खलेगी एनेस्थेटिस्ट की कमी
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जम्मू। कोविड की तीसरी लहर के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाया जा रहा है। लेकिन, विशेषज्ञों की फौज बढ़ाने के लिए ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई है। तीसरी लहर में बाल चिकित्सा के अलावा अन्य चिकित्सा देखभाल के लिए प्रदेश के बीस जिलों में 10-10 बेड के आईसीयू बिस्तर स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन, इनके लिए एनेस्थेटिस्ट की कमी खलेगी।
जम्मू संभाग की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग में एनेस्थेटिस्ट के 61 पद सृजित हैं, जिनमें वर्तमान में 44 ही डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। यानी 17 पद खाली पड़े हैं। इससे कई जिलों में गिने चुने एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में नए मिनी आईसीयू यूनिटों के लिए एनेस्थेटिस्ट विशेषज्ञों की तैनाती बड़ी चुनौती है।
किसी भी आईसीयू को चलाने के लिए एनेस्थेटिस्ट के अलावा प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। आईसीयू में अधिकांश गंभीर मरीजों को रखा जाता है। एनेस्थेटिस्ट की भूमिका मरीज को बेहोश करने या अन्य गंभीर समस्याओं के दौरान उचित चिकित्सा देखभाल देना है। आईसीयू में राउंड द क्लॉक एनेस्थेटिस्ट के अलावा प्रशिक्षित टेक्नीशियन स्टाफ की जरूरत होती है, जिनकी पहले से ही कमी बनी हुई है।
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जम्मू संभाग के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के कुल मिलाकर 2215 पद सृजित हैं, जिसमें 1409 पर ही डॉक्टर तैनात हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में डॉक्टरों के स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल कॉलेजों से उचित चिकित्सा देखभाल के लिए नियुक्ति की गई है, लेकिन सवाल यह है कि अगर प्रशिक्षित टेक्नीशियन स्टाफ और प्रशिक्षित एनेस्थेटिस्ट नहीं होंगे, तो आईसीयू यूनिट कैसे चलाए जाएंगे? कोविड की तीसरी लहर की सूरत में आईसीयू यूनिट गंभीर मरीजों को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन, इसके लिए इन्हें पहले पूरी तरह से कार्यात्मक बनाना होगा।
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जम्मू संभाग की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग में एनेस्थेटिस्ट के 61 पद सृजित हैं, जिनमें वर्तमान में 44 ही डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। यानी 17 पद खाली पड़े हैं। इससे कई जिलों में गिने चुने एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में नए मिनी आईसीयू यूनिटों के लिए एनेस्थेटिस्ट विशेषज्ञों की तैनाती बड़ी चुनौती है।
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किसी भी आईसीयू को चलाने के लिए एनेस्थेटिस्ट के अलावा प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। आईसीयू में अधिकांश गंभीर मरीजों को रखा जाता है। एनेस्थेटिस्ट की भूमिका मरीज को बेहोश करने या अन्य गंभीर समस्याओं के दौरान उचित चिकित्सा देखभाल देना है। आईसीयू में राउंड द क्लॉक एनेस्थेटिस्ट के अलावा प्रशिक्षित टेक्नीशियन स्टाफ की जरूरत होती है, जिनकी पहले से ही कमी बनी हुई है।
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जम्मू संभाग के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के कुल मिलाकर 2215 पद सृजित हैं, जिसमें 1409 पर ही डॉक्टर तैनात हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में डॉक्टरों के स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल कॉलेजों से उचित चिकित्सा देखभाल के लिए नियुक्ति की गई है, लेकिन सवाल यह है कि अगर प्रशिक्षित टेक्नीशियन स्टाफ और प्रशिक्षित एनेस्थेटिस्ट नहीं होंगे, तो आईसीयू यूनिट कैसे चलाए जाएंगे? कोविड की तीसरी लहर की सूरत में आईसीयू यूनिट गंभीर मरीजों को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन, इसके लिए इन्हें पहले पूरी तरह से कार्यात्मक बनाना होगा।