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Jammu News: वार्षिक शुल्क के बावजूद तीन बार प्रिंटिंग फीस ले रहे हैं निजी स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अभिभावकों से वार्षिक शुल्क के नाम पर निजी स्कूल हजारों रुपये ले रहे हैं। यही नहीं, एक साल में तीन बार प्रति बच्चा 200 से 300 रुपए प्रिंटिंग शुल्क के चार्ज किए जा रहे हैं। हर दो महीने के बाद स्कूल अभिभावकों से इस तरह का शुल्क ले रहे है जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
शहर के अधिकांश निजी स्कूल किताबें, वर्दी के साथ-साथ प्रिंटिंग शुल्क के नाम पर सरेआम लूट मचा रहे हैं। निजी स्कूलों ने नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक अलग-अलग प्रिंटिंग चार्ज निर्धारित कर रखे हैं। एक अभिभावक ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि ह्यूमैनिटी पब्लिक स्कूल बाड़ी ब्राह्मणा में दो बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल वार्षिक फीस लेने के बाद भी एक साल में तीन से चार बार प्रिंटिंग शुल्क लेता है। एक बार में 250 रुपये तय किए गए है। इस बार भी प्रिंटिंग शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा है। जब स्कूल से इस बारे में पूछा जाता है तो पर्याप्त जवाब नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी के आगे परेशान हैं। ऐसी स्थिति शहर के अधिकांश स्कूलों की है। हजारों रुपये का वार्षिक शुल्क देने के बाद भी अभिभावकों से अलग-अलग शुल्क लिए जा रहे है। निजी स्कूल अभिभावकों से पैसा कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। हर तरह के शुल्क लगाकर अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग भी मनमानी रोकने में फिलहाल विफल हो रहा है।
इस बार नहीं लेंगे शुल्क
शुल्क के बारे में पता करने के लिए ह्यूमैनिटी पब्लिक स्कूल के प्रबंधक गौरव चाढ़क को फोन किया गया। उन्होंने पहले कहा कि आप स्कूल में आकर बात करें। दोबारा कॉल की तो जवाब मिला कि ऑफिस टाइम में कॉल करें, अभी व्यस्त हूं। दूसरी ओर, स्कूल के अकाउंट अधिकारी आकाशदीप रैना ने बताया कि पहले अभिभावकों से प्रिंटिंग शुल्क लिया जाता था। मगर अब प्रबंधकों ने फैसला लिया है कि इस बार से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
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जम्मू। अभिभावकों से वार्षिक शुल्क के नाम पर निजी स्कूल हजारों रुपये ले रहे हैं। यही नहीं, एक साल में तीन बार प्रति बच्चा 200 से 300 रुपए प्रिंटिंग शुल्क के चार्ज किए जा रहे हैं। हर दो महीने के बाद स्कूल अभिभावकों से इस तरह का शुल्क ले रहे है जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
शहर के अधिकांश निजी स्कूल किताबें, वर्दी के साथ-साथ प्रिंटिंग शुल्क के नाम पर सरेआम लूट मचा रहे हैं। निजी स्कूलों ने नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक अलग-अलग प्रिंटिंग चार्ज निर्धारित कर रखे हैं। एक अभिभावक ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि ह्यूमैनिटी पब्लिक स्कूल बाड़ी ब्राह्मणा में दो बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल वार्षिक फीस लेने के बाद भी एक साल में तीन से चार बार प्रिंटिंग शुल्क लेता है। एक बार में 250 रुपये तय किए गए है। इस बार भी प्रिंटिंग शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा है। जब स्कूल से इस बारे में पूछा जाता है तो पर्याप्त जवाब नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी के आगे परेशान हैं। ऐसी स्थिति शहर के अधिकांश स्कूलों की है। हजारों रुपये का वार्षिक शुल्क देने के बाद भी अभिभावकों से अलग-अलग शुल्क लिए जा रहे है। निजी स्कूल अभिभावकों से पैसा कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। हर तरह के शुल्क लगाकर अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग भी मनमानी रोकने में फिलहाल विफल हो रहा है।
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इस बार नहीं लेंगे शुल्क
शुल्क के बारे में पता करने के लिए ह्यूमैनिटी पब्लिक स्कूल के प्रबंधक गौरव चाढ़क को फोन किया गया। उन्होंने पहले कहा कि आप स्कूल में आकर बात करें। दोबारा कॉल की तो जवाब मिला कि ऑफिस टाइम में कॉल करें, अभी व्यस्त हूं। दूसरी ओर, स्कूल के अकाउंट अधिकारी आकाशदीप रैना ने बताया कि पहले अभिभावकों से प्रिंटिंग शुल्क लिया जाता था। मगर अब प्रबंधकों ने फैसला लिया है कि इस बार से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
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