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विधानसभा में मीडिया की आजादी का मामला गूंजा

Fri, 10 Jun 2016 10:34 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 10 Jun 2016 10:34 PM IST
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press freedom case highlight in assembly
जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा - फोटो : Nikhil Mehta
राज्य विधानसभा में शुक्रवार को मीडिया की आजादी का मामला गूंजा। सरकार की ओर से नई विज्ञापन पॉलिसी पर दिए गए जवाब पर विपक्ष ने सवाल उठाए और इसे वापस करने की मांग रखी। इस दौरान नेकां और पीडीपी विधायक के बीच तकरार भी हुई।
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सदन की कार्यवाही के दौरान नेकां के विधायक मुबारक गुल ने विधायक देवेंद्र राणा का विज्ञापन पालिसी से संबंधित सवाल सदन में रखा, क्योंकि वह सदन में मौजूद नहीं थे। इस दौरान सरकार से पूछा कि क्या सरकार इस नई विज्ञापन पॉलिसी की समीक्षा कर रही है।
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इसके जवाब में सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नईम अख्तर ने सदन में कहा कि कई प्रेस के प्रतिनिधि मंडलों के साथ सरकार द्वारा बातचीत की गई है। राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए हम देखेंगे कि इसमें क्या किया जाएगा।
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मंत्री के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए गुल ने कहा कि विज्ञापन पॉलिसी के पीछे एक पालिटिकल एजेंडा है। इस पर नईम ने कहा कि लगता है एमएलए साहब को मेरा अंग्रेजी में दिया गया, जवाब समझ नहीं आया। लगता है उर्दू तर्जुमा पढ़ना चाहिए था। इस पर गुल भड़क उठे और मंत्री पर चिल्लाने लगे।

गुल ने नईम अख्तर से कहा कि अभी क्या जानते हो आप, कल ही तो सियासत में आए हो। गुल ने यह तक कह डाला कि मैं सियासत में वर्ष 1983 में आया हूं। गुल ने मामले को लेकर हाउस कमेटी के गठन की भी मांग की। इसके साथ ही विधायक सत पाल शर्मा, अली मोहम्मद सागर और विकार रसूल ने पूरक प्रश्न पूछे।

जब मुंह खोलता हूं, तब कोई बात नहीं करता

press freedom case highlight in assembly
शिक्षा मंत्री नईम अख्तर - फोटो : Amar Ujala
गुल द्वारा कही गई बातों का जवाब देते हुए अख्तर ने कहा कि वह सदन के संविधान पर सवाल उठा रहे हैं। जब मैं मुंह खोलता हूं, तब कोई बात नहीं करता। सदन में विधायकों द्वारा पॉलिसी पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इस नई विज्ञापन पॉलिसी में जहां भी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत होगी, सरकार उठाएगी। हम नई नीति के बारे में लोगों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार कर रहे हैं।

रेट डीएवीपी से काफी कम
इस बीच सीपीआई (एम) के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले तो डीएवीपी रेट्स दिए जाते थे, लेकिन अब सूचना विभाग द्वारा अपने रेट लागू किए हैं, जो डीएवीपी से काफी कम हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या डीएवीपी रेट्स को रिवाइज किया जाएगा?

मीडिया को कमजोर करने की कोशिश
कांग्रेस विधायक रिग्जिन जोरा ने भी कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। अगर मीडिया वाइब्रेंट होगा, तो लोकतंत्र में अच्छा कार्य होगा। लेकिन, इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना होगा। उन्होंने सरकार को सलाह दी और कहा कि मीडिया को कभी धमकी नहीं दिया जाना चाहिए।
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