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दोनों सदनों की मंजूरी के बाद जम्मू कश्मीर में एक बार फिर प्रभावी हुआ राष्ट्रपति शासन
Wed, 03 Jul 2019 08:37 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 03 Jul 2019 08:37 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद रियासत जम्मू कश्मीर में बुधवार तीन जुलाई को छह महीने के लिए फिर से राष्ट्रपति शासन प्रभावी तौर पर लागू हो गया।
पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार के गिरने के बाद 20 जून 2018 को जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया गया था। छह महीने की अवधि पूरी होने पर 20 दिसंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के दोनों सदनों से तीन जुलाई से जम्मू कश्मीर में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए मंजूरी हासिल की।
दरअसल जम्मू कश्मीर में हालात को सुधारने के लिए केंद्र राष्ट्रपति शासन के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने के लिए तीन सूत्रीय फार्मूले पर काम कर रहा है। इसमें प्रशासनिक प्रणाली में सुधार व पारदर्शिता लाना, आतंकवादियों व अलगाववादी संगठनों को अलग थलग करना और तीसरा पंचायती सिस्टम को मजबूत कर जमीनी स्तर पर लोगों का विश्वास हासिल करना शामिल है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 26, 27 जून को कश्मीर के दौरे के दौरान किसी तरह का कोई बंद या हड़ताल न होना भी केंद्र के विश्वास बहाली के कदमों को जन सहयोग मिलने के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, गत वर्ष सुरक्षा बलों ने 267 आतंकवादियों को यहां खात्मा किया हैं। इस साल अब तक 122 आतंकवादियों को मारा जा चुका है।
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पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार के गिरने के बाद 20 जून 2018 को जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया गया था। छह महीने की अवधि पूरी होने पर 20 दिसंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के दोनों सदनों से तीन जुलाई से जम्मू कश्मीर में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए मंजूरी हासिल की।
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दरअसल जम्मू कश्मीर में हालात को सुधारने के लिए केंद्र राष्ट्रपति शासन के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने के लिए तीन सूत्रीय फार्मूले पर काम कर रहा है। इसमें प्रशासनिक प्रणाली में सुधार व पारदर्शिता लाना, आतंकवादियों व अलगाववादी संगठनों को अलग थलग करना और तीसरा पंचायती सिस्टम को मजबूत कर जमीनी स्तर पर लोगों का विश्वास हासिल करना शामिल है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 26, 27 जून को कश्मीर के दौरे के दौरान किसी तरह का कोई बंद या हड़ताल न होना भी केंद्र के विश्वास बहाली के कदमों को जन सहयोग मिलने के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, गत वर्ष सुरक्षा बलों ने 267 आतंकवादियों को यहां खात्मा किया हैं। इस साल अब तक 122 आतंकवादियों को मारा जा चुका है।