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जीतेगी जिंदगी: जम्मू से दूसरे राज्यों में प्रत्यारोपण के लिए अंग भेजने की तैयारी, ग्रीन कॉरिडोर का हुआ ट्रायल

Wed, 12 Apr 2023 01:10 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 12 Apr 2023 01:10 PM IST
सार

जीएमसी जम्मू से जम्मू एयरपोर्ट तक कड़ी सुरक्षा के बीच डम्मी अंग ले जाए गए। ट्रायल (मॉकड्रिल) के दौरान मार्ग बंद रखा गया। ट्रायल सफल होने के बाद दूसरे राज्यों में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए जीएमसी से मानव अंग मुहैया करवाए जा सकेंगे। 

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Preparing to send organs for transplant from Jammu to other states green corridor trial done
GMC Jammu - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएमसी जम्मू से जल्द ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस कड़ी में बुधवार को जीएमसी जम्मू से जम्मू एयरपोर्ट तक कड़ी सुरक्षा के बीच डम्मी अंग ले जाए गए। ट्रायल (मॉकड्रिल) के दौरान मार्ग बंद रखा गया। ट्रायल सफल होने के बाद दूसरे राज्यों में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए जीएमसी से मानव अंग मुहैया करवाए जा सकेंगे। 

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जीएमसी के एसोसिएटेड अस्पतालों में मौजूदा कॉर्निया (नेत्र) और किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा दी जा रही है। लेकिन अन्य महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है। स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के संयुक्त निदेशक डॉ. संजीव पुरी के अनुसार जीएमसी जम्मू से सुबह 10.30 बजे से एयरपोर्ट तक डम्मी अंग लेकर ग्रीन कॉरिडोर का ट्रायल किया गया। जिस रूट से डम्मी मानव अंग भेजे गए, उसे कुछ देर के लिए बंद रखा गया, ताकि अंगों को निर्धारित समय में अपने गंतव्य लक्ष्य तक पहुंचाया जा सके। इसमें जीएमसी जम्मू से एयरपोर्ट जम्मू तक करीब 7.7 किलोमीटर का ट्रायल किया गया। 
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ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दूसरे राज्यों के अस्पतालों में कुछ घंटों के भीतर जरूरतमंद मरीजों तक अंग प्रत्यारोपण के लिए पहुंचाए जाते हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू में अब तक 13 सफल किडनी प्रत्यारोपण के दावे किए गए हैं। 38 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। ये सभी प्रत्यारोपण लाइव डोनर के सहयोग से हुए हैं, लेकिन सड़क हादसे, ब्रेन हेमरेज जैसे मामलों में ब्रेन डेड मरीजों के किडनी सहित अन्य अंग नहीं उपलब्ध हो रहे हैं। ऐसे मामलों में ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से मानव अंगों को दूसरे राज्यों में पहुंचाया जाता है। 
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ब्रेन डेड मामले में मरीज के किडनी, लिवर, हृदय, पैनक्रिया, टिशू, कॉर्निया आदि का प्रत्यारोपण किया जा सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया कुछ ही घंटे के भीतर संभव होती है। जीएमसी की इमरजेंसी में प्रतिदिन कई मौतें होती हैं, अगर ऐसे मामलों में तीमारदारों की रजामंदी से मृतक के अंग दान करना चाहें तो जरूरत मंद मरीजों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है।


पीजीआई सहित अन्य संस्थानों का सहयोग : प्रिंसिपल

जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा को शुरू करने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ सहित देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के अलावा एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है। इससे जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकेगी।

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