{"_id":"679151c3afbf9a161d00aa1e","slug":"polyhouse-change-the-technique-samba-news-c-10-1-jmu1038-529211-2025-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: पॉलीहाउस से बदल रही है खेती की तकनीक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: पॉलीहाउस से बदल रही है खेती की तकनीक
Thu, 23 Jan 2025 01:44 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 23 Jan 2025 01:44 AM IST
विज्ञापन
सांबा में कृषि विभाग की ओर से लगाया गया पाॅली हाउस। संवाद
- फोटो : samba
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को हाइटेक बना रहा कृषि विभाग, पॉलीहाउस से उगा रहे बे-मौसमी सब्जियां
सांबा। जिले में पॉलीहाउस से खेती की तकनीक बदल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़े लिखे युवा भी इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। कृषि विभाग ने जिले में छोटे-बड़े 10 हाइटेक पॉली हाउस स्थापित किए हैं।पाॅली हाउस में नियंत्रित वातावरण में समय से पहले फसल सब्जियां तैयार की जा रही हैं। किसानों में तेजी से इसकी और रुझान बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है की सीजन की सब्जी यदि समय से पहले तैयार करनी हो तो हर किस्म की सब्जी के लिए पॉली हाउस खेती के लिए अच्छे साबित हो रहे हैं। मगर बड़े पाॅलीहाउस तो ज्यादा फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इसमें तापमान को नियंत्रित करने के लिए फन एंड फेयर कूलर व हीटर लगे होते हैं। इससे गर्मी व ठंड से तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे किसानों को दोगुना लाभ मिल रहा है।
सरकार 95 प्रतिशत दे रही सबसिडी
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मैच मैन की खेती का समय है। किसानों को समय के साथ चलना चाहिए। इस विभाग की तरफ से 95 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। यदि किसान छोटा पाॅलीहाउस 150 वर्ग मीटर में स्थापित करता है तो कुल लागत 2.5 लाख रुपए की आ जाती है। मगर इससे भी काफी सारा खर्च सरकार उठा रही है। किसानों को पांच प्रतिशत ही देना होता है। अगर किसान हाईटेक पाॅली हाउस 500 वर्ग मीटर में लगाता है तो 22 लाख रुपये खर्च आएगा, जिसमें पांच प्रतिशत किसान को देना है। दोनों किस्म के पाली हाउस खेती के लिए खूब कारगर साबित हो रहे हैं।
मुझे बचपन से ही खेती का शौक था। 12वीं पास करने के बाद मैंने एक ट्रैक्टर ले लिया। पिता की मौत के बाद कमाई का कोई साधन नहीं था। रोजगार नहीं मिलने पर खेती में धान व गेहूं के साथ सब्जी भी लगाना शुरू कर दी। कृषि विभाग के साथ जुड़ा रहा। कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर उत्तम खेती के बारे में जानकारी हासिल की। आवेदन किया तो कुछ दिनों बाद ही पॉली हाउस बनाने के लिए कारीगर आ गए। पहली बार टमाटर की फसल लगाई है। इसमें घीया, करेला की पनीरी भी लगाई है। आगामी 15 दिन तक टमाटर तैयार हो जाएगा। संवाद
विज्ञापन
उदय बसकोतरा, युवा किसान
एचएडीपी उप परियोजना के तहत अब तक 10 हाई-टेक पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं और 5 इकाइयों पर काम चल रहा है। संरक्षित खेती ने ऑफ सीजन के दौरान भी ब्रोकोली, बेल पेपर, बीज रहित ककड़ी, बैंगनी फूलगोभी आदि विदेशी सब्जियों के उच्च मूल्य के उत्पादन को बढ़ावा दिया है। जिले के किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं।
स. मदन गोपाल सिंह, मुख्य जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
सांबा। जिले में पॉलीहाउस से खेती की तकनीक बदल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़े लिखे युवा भी इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। कृषि विभाग ने जिले में छोटे-बड़े 10 हाइटेक पॉली हाउस स्थापित किए हैं।पाॅली हाउस में नियंत्रित वातावरण में समय से पहले फसल सब्जियां तैयार की जा रही हैं। किसानों में तेजी से इसकी और रुझान बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है की सीजन की सब्जी यदि समय से पहले तैयार करनी हो तो हर किस्म की सब्जी के लिए पॉली हाउस खेती के लिए अच्छे साबित हो रहे हैं। मगर बड़े पाॅलीहाउस तो ज्यादा फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इसमें तापमान को नियंत्रित करने के लिए फन एंड फेयर कूलर व हीटर लगे होते हैं। इससे गर्मी व ठंड से तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे किसानों को दोगुना लाभ मिल रहा है।
सरकार 95 प्रतिशत दे रही सबसिडी
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मैच मैन की खेती का समय है। किसानों को समय के साथ चलना चाहिए। इस विभाग की तरफ से 95 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। यदि किसान छोटा पाॅलीहाउस 150 वर्ग मीटर में स्थापित करता है तो कुल लागत 2.5 लाख रुपए की आ जाती है। मगर इससे भी काफी सारा खर्च सरकार उठा रही है। किसानों को पांच प्रतिशत ही देना होता है। अगर किसान हाईटेक पाॅली हाउस 500 वर्ग मीटर में लगाता है तो 22 लाख रुपये खर्च आएगा, जिसमें पांच प्रतिशत किसान को देना है। दोनों किस्म के पाली हाउस खेती के लिए खूब कारगर साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
मुझे बचपन से ही खेती का शौक था। 12वीं पास करने के बाद मैंने एक ट्रैक्टर ले लिया। पिता की मौत के बाद कमाई का कोई साधन नहीं था। रोजगार नहीं मिलने पर खेती में धान व गेहूं के साथ सब्जी भी लगाना शुरू कर दी। कृषि विभाग के साथ जुड़ा रहा। कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर उत्तम खेती के बारे में जानकारी हासिल की। आवेदन किया तो कुछ दिनों बाद ही पॉली हाउस बनाने के लिए कारीगर आ गए। पहली बार टमाटर की फसल लगाई है। इसमें घीया, करेला की पनीरी भी लगाई है। आगामी 15 दिन तक टमाटर तैयार हो जाएगा। संवाद
विज्ञापन
उदय बसकोतरा, युवा किसान
एचएडीपी उप परियोजना के तहत अब तक 10 हाई-टेक पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं और 5 इकाइयों पर काम चल रहा है। संरक्षित खेती ने ऑफ सीजन के दौरान भी ब्रोकोली, बेल पेपर, बीज रहित ककड़ी, बैंगनी फूलगोभी आदि विदेशी सब्जियों के उच्च मूल्य के उत्पादन को बढ़ावा दिया है। जिले के किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं।
स. मदन गोपाल सिंह, मुख्य जिला कृषि अधिकारी