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Jammu News: पेपरलेस होगी जम्मू-कश्मीर विधानसभा, 23 को बैठक
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि विधानसभा जल्द आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर पेपरलेस होने जा रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के समन्वय व सहयोग से नेवा (नेशनल ई-विधान ऍप्लिकेल्शन) परियोजना लागू की जाएगी। इसके लिए श्रीनगर में 23 जुलाई को हाई लेवल अपैक्स कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें नेवा प्रोजेक्ट पर चर्चा की जाएगी।
स्पीकर राथर ने बताया कि हमें विधानसभा में ई-विधान (नेवा) प्रोजेक्ट लागू करना है। प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद सब कुछ डिजिटलाइज होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से यह सब किया जाएगा। मार्च 2026 में सदन के अगले बजट सत्र तक कामकाज को पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है। इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि राथर की अध्यक्षता वाली एचएलएसी में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन सदस्य- हसनैन मसूदी, तनवीर सादिक और अर्जुन सिंह राजू, भाजपा के दो- डॉ. सुनील भारद्वाज और डॉ. भारत भूषण और कांग्रेस के निजाम-उद-दीन भट और पीडीपी के वहीद-उर-रहमान पर्रा के अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का वित्तपोषण किया है। यह डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है।
संसद के अलावा, देश भर के कई विधानमंडल पहले ही कागज रहित हो चुके हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पिछले साल अक्तूबर के मध्य में अपने गठन के बाद इस परियोजना को शुरू किया था।
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केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है ई-विधान
एचएलएसी के सदस्य और रामनगर से भाजपा विधायक डॉ. सुनील भारद्वाज ने कहा, यह केंद्र का प्रोजेक्ट है। ई-विधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि विधानसभा पेपरलेस होने जा रही है। जम्मू-कश्मीर इसमें बहुत पीछे हैं, क्योंकि कई विधानसभाएं पहले से पेपरलेस हो चुकी हैं। चूंकि यहां जम्मू-कश्मीर में सरकार नहीं थी तो इसपर काम नहीं हो पाया। केंद्र सरकार 15 करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए दे रही है।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि विधानसभा जल्द आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर पेपरलेस होने जा रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के समन्वय व सहयोग से नेवा (नेशनल ई-विधान ऍप्लिकेल्शन) परियोजना लागू की जाएगी। इसके लिए श्रीनगर में 23 जुलाई को हाई लेवल अपैक्स कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें नेवा प्रोजेक्ट पर चर्चा की जाएगी।
स्पीकर राथर ने बताया कि हमें विधानसभा में ई-विधान (नेवा) प्रोजेक्ट लागू करना है। प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद सब कुछ डिजिटलाइज होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से यह सब किया जाएगा। मार्च 2026 में सदन के अगले बजट सत्र तक कामकाज को पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है। इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि राथर की अध्यक्षता वाली एचएलएसी में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन सदस्य- हसनैन मसूदी, तनवीर सादिक और अर्जुन सिंह राजू, भाजपा के दो- डॉ. सुनील भारद्वाज और डॉ. भारत भूषण और कांग्रेस के निजाम-उद-दीन भट और पीडीपी के वहीद-उर-रहमान पर्रा के अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का वित्तपोषण किया है। यह डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है।
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संसद के अलावा, देश भर के कई विधानमंडल पहले ही कागज रहित हो चुके हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पिछले साल अक्तूबर के मध्य में अपने गठन के बाद इस परियोजना को शुरू किया था।
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केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है ई-विधान
एचएलएसी के सदस्य और रामनगर से भाजपा विधायक डॉ. सुनील भारद्वाज ने कहा, यह केंद्र का प्रोजेक्ट है। ई-विधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि विधानसभा पेपरलेस होने जा रही है। जम्मू-कश्मीर इसमें बहुत पीछे हैं, क्योंकि कई विधानसभाएं पहले से पेपरलेस हो चुकी हैं। चूंकि यहां जम्मू-कश्मीर में सरकार नहीं थी तो इसपर काम नहीं हो पाया। केंद्र सरकार 15 करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए दे रही है।