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Jammu News: जम्मू-कश्मीर भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन का दौर पूरा
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सबहेडः पार्टी में कुछ नेताओं के पास पांच साल तो कई के पास अभी सक्रिय राजनीति में रहने के लिए दो से ढाई दशक तक का समय
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के 75 की उम्र में रिटायर होने के बयान पर प्रदेश इकाई बेफिक्र
रोली खन्ना
जम्मू। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के नेताओं की उम्र के संबंध में दिए गए बयान से सियासत में सदस्यों की उम्र को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। इस बीच जम्मू-कश्मीर भाजपा की बात करें तो यहां आरएसएस प्रमुख की ओर से तय एसओपी का कड़ाई से पालन हो रहा है। मौजूदा वक्त में प्रदेश में पार्टी व संगठन की कमान उनके हाथों में है, जिनके पास खुद को साबित करने, सक्रिय राजनीति में बने रहने के लिए दो से ढाई दशक का समय है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर दोहराया है कि नेताओं को 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। प्रदेश भाजपा इस एसओपी को पूरी तरह से पूरा कर रही है। कुछ नेता ही 70 की उम्र के करीब है। ज्यादातर 45 से 65 की आयु वर्ग के बीच है और पूरी ऊर्जा के साथ अपना शत प्रतिशत संगठन के कामों में दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष की नई टीम जब घोषित होगी, उसमें भी एसओपी छाप नजर आएगी। मौजूदा टीम की बात करें तो भाजपा प्रदेश सत शर्मा की उम्र 63 साल है, जबकि प्रदेश महामंत्री व नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा 48 वर्ष, महामंत्री एडवोकेट विबोध गुप्ता 61 साल, डॉ. देवेन्द्र कुमार मन्याल 55 और संगठन महामंत्री अशोक कौल भी 67 साल के हैं। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रभारी तरुण चुघ भी 53 साल के ही हैं।
उपाध्यक्षों की टीम पर भी उम्र का बोझ नहीं
पार्टी उपाध्यक्षों की बात करें तो शाम चौधरी, शामलाल शर्मा, युद्धवीर सेठी, शक्ति परिहार, अनुराधा सिंह, असीम गुप्ता, चंद्रमोहन गुप्ता, सुरजीत सिंह सलाथिया, सोफी युसुफ जैसे चेहरे शामिल हैं। इनमें सुरजीत सिंह सलाथिया ही महज 70 वर्ष के। अन्य सभी 50 से 65 के बीच की आयु वर्ग के हैं। सभी नई पारी की पूरी संभावनाओं से भरपूर।
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10 साल से अधिक वक्त हुआ बदलाव आए
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. रेखा चौधरी कहती हैं कि 10 से 12 साल का वक्त हो गया, जब प्रदेश भाजपा का चेहरा बदल गया है। एक वक्त ऐसा भी था, जब स्थायी नेतृत्व न होने से पार्टी में एक खालीपन आ गया था। नई पीढ़ी के पास नए मुकाम पाने के पूरे अवसर हैं। हालांकि, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि उम्र के साथ बुद्धिमता का विकास भी होता है।
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आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के 75 की उम्र में रिटायर होने के बयान पर प्रदेश इकाई बेफिक्र
रोली खन्ना
जम्मू। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के नेताओं की उम्र के संबंध में दिए गए बयान से सियासत में सदस्यों की उम्र को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। इस बीच जम्मू-कश्मीर भाजपा की बात करें तो यहां आरएसएस प्रमुख की ओर से तय एसओपी का कड़ाई से पालन हो रहा है। मौजूदा वक्त में प्रदेश में पार्टी व संगठन की कमान उनके हाथों में है, जिनके पास खुद को साबित करने, सक्रिय राजनीति में बने रहने के लिए दो से ढाई दशक का समय है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर दोहराया है कि नेताओं को 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। प्रदेश भाजपा इस एसओपी को पूरी तरह से पूरा कर रही है। कुछ नेता ही 70 की उम्र के करीब है। ज्यादातर 45 से 65 की आयु वर्ग के बीच है और पूरी ऊर्जा के साथ अपना शत प्रतिशत संगठन के कामों में दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष की नई टीम जब घोषित होगी, उसमें भी एसओपी छाप नजर आएगी। मौजूदा टीम की बात करें तो भाजपा प्रदेश सत शर्मा की उम्र 63 साल है, जबकि प्रदेश महामंत्री व नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा 48 वर्ष, महामंत्री एडवोकेट विबोध गुप्ता 61 साल, डॉ. देवेन्द्र कुमार मन्याल 55 और संगठन महामंत्री अशोक कौल भी 67 साल के हैं। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रभारी तरुण चुघ भी 53 साल के ही हैं।
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उपाध्यक्षों की टीम पर भी उम्र का बोझ नहीं
पार्टी उपाध्यक्षों की बात करें तो शाम चौधरी, शामलाल शर्मा, युद्धवीर सेठी, शक्ति परिहार, अनुराधा सिंह, असीम गुप्ता, चंद्रमोहन गुप्ता, सुरजीत सिंह सलाथिया, सोफी युसुफ जैसे चेहरे शामिल हैं। इनमें सुरजीत सिंह सलाथिया ही महज 70 वर्ष के। अन्य सभी 50 से 65 के बीच की आयु वर्ग के हैं। सभी नई पारी की पूरी संभावनाओं से भरपूर।
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10 साल से अधिक वक्त हुआ बदलाव आए
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. रेखा चौधरी कहती हैं कि 10 से 12 साल का वक्त हो गया, जब प्रदेश भाजपा का चेहरा बदल गया है। एक वक्त ऐसा भी था, जब स्थायी नेतृत्व न होने से पार्टी में एक खालीपन आ गया था। नई पीढ़ी के पास नए मुकाम पाने के पूरे अवसर हैं। हालांकि, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि उम्र के साथ बुद्धिमता का विकास भी होता है।