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Jammu News: ओबीसी आरक्षण की सिफारिश में उलझा पंचायती राज चुनाव

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- राज्य में हैं 285 ब्लाॅक और 4291 पंचायतें, जून 2023 में की गई थी सिफारिश
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अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। सूबे में पंचायती राज चुनाव पर ओबीसी आयोग की सिफारिश बाधा बन गई है। सिफारिश पर फैसले से पहले चुनाव संभव नहीं हैं। पंचायती राज विभाग और सूबे की पंचायतों के तमाम प्रतिनिधि इसके फैसले इंतजार कर रहे हैं। फैसले के बाद राज्य में चुनाव को लेकर कवायद शुरू होगी।
पंचायती राज चुनाव कब होंगे, इसका फैसला राज्य सरकार को करना है। संभावना जताई जा रही है कि ओबीसी सिफारिशों पर फैसले के बाद राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग में बैठकों का दौर शुरू होगा और इसके बाद चुनाव पर फैसला लिया जा सकता है।
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11 जून 2023 को जम्मू-कश्मीर में पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना की गई थी। इसमें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जनकराज कोतवाल अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी आरके भगत और स्काॅस्ट जम्मू के पूर्व डीन डाॅ. मोहिंदर सिंह बडवाल सदस्य थे। जम्मू-कश्मीर में पंचायतों और ब्लाॅक विकास परिषदों का पांच साल का कार्यकाल 9 जनवरी 2024 को पूरा हो चुका है।
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सरकार को पंचायत चुनाव के लिए पहले पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की सिफारिशों पर फैसला लेना होगा। राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव के लिए तैयारी चल रही है। ओबीसी आयोग ने गत फरवरी के अंत में मुख्य सचिव अटल डुल्लू को ओबीसी आरक्षण की सिफारिशें सौंपी थीं। लेकिन डेढ़ माह बाद भी सरकार फैसला नहीं ले पाई है। सरकार सारी सिफारिशों को मान सकती है या उसमें संशोधन कर सकती है। ऐसे में पंचायती राज चुनाव में देरी हो सकती है। किसी चुनाव की तैयारी में कम से कम एक साल का समय लग जाता है। राज्य में 285 ब्लाॅक और 4291 पंचायतें हैं।


परिसीमन होना मुश्किल
आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन होना मुश्किल लग रहा है। वर्ष 2017-18 में भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार में पंचायतों का परिसीमन किया गया था, जिसमें करीब 400 पंचायतों का विस्तार किया गया था। पंचायती राज अधिनियम में बताया गया है कि अगर किसी मैदानी पंचायत में 4500 और पहाड़ी पंचायत में 3000 से अधिक की आबादी है तो वहां पंचायतों के विस्तार का प्रावधान है। लेकिन इसके लिए सिर्फ 2011 की जनगणना का आधार ही है पिछले चौदह वर्षों में आबादी काफी बढ़ी है। इससे गत परिसीमन को ही लगभग अमल में लाया जाएगा। विधानसभा में पंचायत चुनाव से पहले इनके परिसीमन की मांग उठी थी। अधिनियम ये भी कहता है कि परिसीमन नई जनगणना के आधार पर ही हो सकता है।



30 हजार बैलेट बाॅक्स खरीदे
पंचायतों का चुनाव बैलेट से होगा। इसके लिए राज्य चुनाव आयोग ने 30 हजार बैलेट बाॅक्स खरीदे हैं। पूरे प्रदेश में आठ से नौ चरणों में पंचायत चुनाव करवाए जा सकते हैं। ऐसे में प्रत्येक चरण में चुनाव करवाने में 24-25 दिन लगते हैं। जिसमें सात दिन नामांकन, एक दिन जांच, दो दिन नामांकन वापस लेने और 14 दिन प्रचार आदि के शामिल रहते हैं।
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