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सरकार लगातार कर रही प्रदेश की संस्कृति की उपेक्षा : भाजपा
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भाषाओं, कलाओं और विरासत के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश की संस्कृति की उपेक्षा के लिए भाजपा नेता शुक्रवार को सरकार पर बरसे। उन्होंने प्रदेश सरकार पर संस्कृति की उपेक्षा का आरोप लगाया। क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने और विस्थापित समुदायों की सहायता करने में राज्य सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए प्रवक्ता अजय भारती, डॉ. ताहिर चौधरी और जोरावर सिंह जमवाल ने राजनीतिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ते अंतर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की।
भारती ने कहा कि उमर अब्दुल्ला 353 दिन पहले जम्मू-कश्मीर के सांस्कृतिक परिदृश्य को संरक्षित करने के वादे वाले घोषणापत्र के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन पेंशन, बिजली, गैस और राशन से जुड़ी प्रमुख प्रतिबद्धताएं अभी भी अधूरी हैं। शंकराचार्य और हरि पर्वत को गंडोला के ज़रिए जोड़ने जैसी सांस्कृतिक पहल भी आगे नहीं बढ़ पाई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की विशिष्ट सांस्कृतिक जरूरतें हैं जिनमें उनकी भाषाओं की मान्यता भी शामिल है। उन्होंने कला, भाषा, भोजन और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए एक स्थानीय फिल्म उद्योग की स्थापना का आह्वान किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश की संस्कृति की उपेक्षा के लिए भाजपा नेता शुक्रवार को सरकार पर बरसे। उन्होंने प्रदेश सरकार पर संस्कृति की उपेक्षा का आरोप लगाया। क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने और विस्थापित समुदायों की सहायता करने में राज्य सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए प्रवक्ता अजय भारती, डॉ. ताहिर चौधरी और जोरावर सिंह जमवाल ने राजनीतिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ते अंतर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की।
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भारती ने कहा कि उमर अब्दुल्ला 353 दिन पहले जम्मू-कश्मीर के सांस्कृतिक परिदृश्य को संरक्षित करने के वादे वाले घोषणापत्र के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन पेंशन, बिजली, गैस और राशन से जुड़ी प्रमुख प्रतिबद्धताएं अभी भी अधूरी हैं। शंकराचार्य और हरि पर्वत को गंडोला के ज़रिए जोड़ने जैसी सांस्कृतिक पहल भी आगे नहीं बढ़ पाई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की विशिष्ट सांस्कृतिक जरूरतें हैं जिनमें उनकी भाषाओं की मान्यता भी शामिल है। उन्होंने कला, भाषा, भोजन और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए एक स्थानीय फिल्म उद्योग की स्थापना का आह्वान किया।
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