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नेकां नेतृत्व भाजपा के साथ गठबंधन करने का इच्छुक : राणा
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भाजपा नेता ने कहा, 2014 के चुनाव के बाद से ही कई कोशिशें की गईं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डाॅ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से नेशनल कांफ्रेंस के अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद नेकां से भाजपा में आए देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व भाजपा के साथ गठबंधन करने का इच्छुक है। 2014 में विधानसभा चुनाव के बाद से ही इस प्रकार की कोशिशें चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बयान ने मुझे बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं किया है, क्योंकि 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व हमेशा भाजपा के साथ गठबंधन करने को उत्सुक रहा है। 2014 में उमर अब्दुल्ला ने भाजपा के साथ सरकार बनाने का अनुरोध किया था, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया था। फिर 2017 में, जब मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया और कुछ अंतराल तक सरकार नहीं थी, तब भी फारूक अब्दुल्ला ने कटड़ा में कहा कि वे बीजेपी के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। उस वक्त भी भाजपा ने इसे खारिज कर दिया था। राणा ने कहा, मैं आपको यह बात बहुत विश्वास के साथ बता रहा हूं कि बार-बार प्रयास किए गए, क्योंकि मैं नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रणाली का हिस्सा था। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद भी भाजपा के साथ किसी तरह का रणनीतिक गठबंधन या आपसी समझ विकसित करने की कोशिश की गई।
ज्ञात हो कि वीरवार को फारूक अब्दुल्ला की अकेले लड़ने की घोषणा से इंडिया गठबंधन को जम्मू-कश्मीर में बड़ा झटका लगा था। फारूक के बयान के बाद पीडीपी ने भी कहा था कि वह इस फैसले पर विचार कर निर्णय लेगी। जनवरी की शुरुआत में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा पश्चिम बंगाल में आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की कसम खाने के बाद इंडिया ब्लॉक को एक बड़ा झटका लगा। हाल ही में यूपी में राष्ट्रीय लोक दल भी गठबंधन से बाहर हो गया और एनडीए के साथ साझेदारी कर ली। बाद में जनवरी में इंडिया ब्लॉक के प्रमुख वास्तुकारों में से एक, जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख नीतीश कुमार, बिहार में महागठबंधन से बाहर हो गए और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ फिर से जुड़ गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डाॅ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से नेशनल कांफ्रेंस के अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद नेकां से भाजपा में आए देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व भाजपा के साथ गठबंधन करने का इच्छुक है। 2014 में विधानसभा चुनाव के बाद से ही इस प्रकार की कोशिशें चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बयान ने मुझे बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं किया है, क्योंकि 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व हमेशा भाजपा के साथ गठबंधन करने को उत्सुक रहा है। 2014 में उमर अब्दुल्ला ने भाजपा के साथ सरकार बनाने का अनुरोध किया था, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया था। फिर 2017 में, जब मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया और कुछ अंतराल तक सरकार नहीं थी, तब भी फारूक अब्दुल्ला ने कटड़ा में कहा कि वे बीजेपी के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। उस वक्त भी भाजपा ने इसे खारिज कर दिया था। राणा ने कहा, मैं आपको यह बात बहुत विश्वास के साथ बता रहा हूं कि बार-बार प्रयास किए गए, क्योंकि मैं नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रणाली का हिस्सा था। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद भी भाजपा के साथ किसी तरह का रणनीतिक गठबंधन या आपसी समझ विकसित करने की कोशिश की गई।
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ज्ञात हो कि वीरवार को फारूक अब्दुल्ला की अकेले लड़ने की घोषणा से इंडिया गठबंधन को जम्मू-कश्मीर में बड़ा झटका लगा था। फारूक के बयान के बाद पीडीपी ने भी कहा था कि वह इस फैसले पर विचार कर निर्णय लेगी। जनवरी की शुरुआत में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा पश्चिम बंगाल में आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की कसम खाने के बाद इंडिया ब्लॉक को एक बड़ा झटका लगा। हाल ही में यूपी में राष्ट्रीय लोक दल भी गठबंधन से बाहर हो गया और एनडीए के साथ साझेदारी कर ली। बाद में जनवरी में इंडिया ब्लॉक के प्रमुख वास्तुकारों में से एक, जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख नीतीश कुमार, बिहार में महागठबंधन से बाहर हो गए और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ फिर से जुड़ गए।
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