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केंद्रीय मंत्री ने किया आजादी का अमृत महोत्सव सप्ताह का शुभारंभ
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जम्मू। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य में होने वाला विकास विज्ञान संचालित अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है। यह बातें उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव सप्ताह के शुभारंभ सत्र में कहीं। उन्होंने नीली अर्थव्यवस्था में अनुसंधान प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश स्वतंत्रता का 75वां वर्ष मना रहा है। इस संचेतना के साथ कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत के समावेशी विकास के लिए मुख्य मुद्रा बनने जा रही है। यह अगले 25 वर्षों की योजना बनाने का अवसर भी है। कहा कि भारत की नीली अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के एक उपसमूह के रूप में माना जाता है जिसमें देश के कानूनी अधिकार क्षेत्र के तहत बंदरगाह, समुद्र और समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों में पूरी महासागर संसाधन प्रणाली और मानव निर्मित आर्थिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। इससे उन वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में मदद मिलती है जिनका आर्थिक प्रगति, पर्यावरण संबंधी स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ स्पष्ट संबंध है। भारत जैसे तटीय देशों के लिए नीली अर्थव्यवस्था सामाजिक लाभ का मुख्य बिंदु है, जो समुद्री संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने का एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक अवसर प्रदान करती है।
समाज के सभी वर्गों के हितधारकों तक पहुंचने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग को परस्पर जोड़ना आजादी का अमृत महोत्सव का ही एक विषय है। इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि स्वदेशी स्टार्टअप आज के कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लें। कहा कि आने वाले समय में समुद्री प्रदूषण एक गंभीर चुनौती पेश करने वाला है और तटीय भूमि का क्षरण बढ़ाएगा।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश स्वतंत्रता का 75वां वर्ष मना रहा है। इस संचेतना के साथ कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत के समावेशी विकास के लिए मुख्य मुद्रा बनने जा रही है। यह अगले 25 वर्षों की योजना बनाने का अवसर भी है। कहा कि भारत की नीली अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के एक उपसमूह के रूप में माना जाता है जिसमें देश के कानूनी अधिकार क्षेत्र के तहत बंदरगाह, समुद्र और समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों में पूरी महासागर संसाधन प्रणाली और मानव निर्मित आर्थिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। इससे उन वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में मदद मिलती है जिनका आर्थिक प्रगति, पर्यावरण संबंधी स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ स्पष्ट संबंध है। भारत जैसे तटीय देशों के लिए नीली अर्थव्यवस्था सामाजिक लाभ का मुख्य बिंदु है, जो समुद्री संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने का एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक अवसर प्रदान करती है।
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समाज के सभी वर्गों के हितधारकों तक पहुंचने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग को परस्पर जोड़ना आजादी का अमृत महोत्सव का ही एक विषय है। इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि स्वदेशी स्टार्टअप आज के कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लें। कहा कि आने वाले समय में समुद्री प्रदूषण एक गंभीर चुनौती पेश करने वाला है और तटीय भूमि का क्षरण बढ़ाएगा।
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