कश्मीर: आतंकी हमले में ‘24 घंटे ड्यूटी कॉप’ शहीद
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पुलिस विभाग में ‘24 घंटे ड्यूटी काप’ के नाम से मशहूर सब इंस्पेक्टर अल्ताफ अहमद लश्कर आतंकियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में शहीद हो गए।
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह जब रोजमर्रा की तरह अल्ताफ अपने कार्यालय पहुंचे तो उन्हें सूचना मिली कि लश्कर का 10 लाख का इनामी कमांडर अब्दुल रहमान उर्फ कासिम बांडीपोरा में एक मकान में छिपा हुआ है।
सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अल्ताफ अपने वाहन से उस मकान की ओर निकल गए जहां लश्कर कमांडर के छिपे होने की सूचना मिली थी। पुलिस को कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अल्ताफ के अपने कार्यालय से निकलने के कुछ देर बाद ही एक पिक अप वैन उनका पीछा कर रही थी।
जैसे ही अल्ताफ अरागमा इलाके में पहुंचे, पिक अप वैन ने अल्ताफ के वाहन को ओवरटेक (आगे निकल गई) किया। इसी दौरान उसमें सवार आतंकियों ने अल्ताफ को निशाना बनाकर दो गोलियां उनके सीने में बाईं ओर और एक गोली दाईं ओर दागी। इसके बाद उसी वैन से आतंकी फरार हो गए।
हर कोई कायल था अल्ताफ की बहादुरी का
गंभीर घायल अल्ताफ को बादामी बाग स्थित सेना के बेस अस्पताल पहुंचाया गया, पर वहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक विभाग में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए अल्ताफ को 2007 से लेकर 2012 के बीच में उनकी बहादुरी और व्यवसायिक क्षमताओं के लिए तीन प्रमोशन दिए गए।
वर्तमान चीफ विजिलेंस कमिश्नर कुलदीप खुड्डा उस दौरान पुलिस महानिदेशक थे। विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक 2008 के बाद आतंकियों के खिलाफ किए गए सफल आपरेशनों में से 50 प्रतिशत आपरेशनों में अल्ताफ शामिल रहे।
अल्ताफ को कई आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के साथ ही कई आतंकियों को गिरफ्तार करने और मार गिराने का श्रेय भी जाता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री मुफ्ती माहेम्मद सईद, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एवं सेना तथा इंटेलिजेंस एजेंसियों के अधिकारियों द्वारा भी शहीद सब इंस्पेक्टर अल्ताफ को श्रद्धांजलि दी गई।
कई मेडल से सम्मानित हुए चुके हैं अल्ताफ
एक कांस्टेबल के तौर पर पुलिस में भर्ती हुए अल्ताफ अहमद अपनी कार्यक्षमता और बहादुरी के लिए कई बार सम्मान हासिल कर चुके हैं।
कुलगाम और देवसर विधानसभा क्षेत्रों की सीमा पर स्थित एक गांव के रहने वाले अल्ताफ को रियासत और केंद्र सरकार की ओर से गैलेंट्री मेडल मिल चुके हैं।
अल्ताफ के परिवार में उनकी पत्नी और दो और चार साल के दो मासूम बच्चे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अल्ताफ ने कभी ड्यूटी के लिए न नहीं की और न ही कभी आनाकानी की। वो ड्यूटी के लिए हमेशा तत्पर रहते थे, इसलिए उन्हें विभाग में ‘24 घंटे ड्यूटी काप’ के नाम से जाना जाता था।