भूमि अधिग्रहण बिल पर क्या बोले सीएम मुफ्ती, पढ़ें खबर
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भाजपा के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में सरकार चला रहे मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने केंद्र सरकार की राय पर मुहर लगाने से परहेज करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाने पर जोर दिया है।
नीति आयोग की संचालन परिषद की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए मुफ्ती ने कहा कि हालांकि नया कानून जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होता, फिर भी वे इस मुद्दे पर सबकी सलाह को महत्व दिए जाने के पक्षधर हैं। विरोधियों के विचारों को भी अहमियत दी जानी चाहिए।
उन्होंने सर्वदलीय बैठक का प्रस्ताव रखा। मुफ्ती ने कहा कि प्रस्तावित मुआवजे, राहत और पुनर्वास पर असहमति नहीं है, लेकिन सलाह मशविरा और इसके सामाजिक प्रभाव के आकलन पर चिंताएं जरूर हैं।
जरूरतों के हिसाब से नीतियां तय करें
मुफ्ती ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना अधिनियम में उचित मुआवजा पाने के अधिकार को विस्तार देने तथा पारदर्शिता को लागू करने की वकालत की। उन्होंने कहा राष्ट्रीय नीतियों को और लचीला बनाए जाने की जरूरत है।
राज्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नीतियां तय कर सकें। मजबूत राज्य से ही मजबूत देश की कल्पना की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि एक ही साइज का जूता हर पैर में फिट नहीं हो सकता है। इसलिए योजनाएं स्थानीय जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बनाई जानी चाहिए।
राज्यों को यह छूट मिलनी चाहिए कि वे अपने हिसाब से राष्ट्रीय नीतियों को लागू कर सकें। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का अपना भूमि अधिग्रहण कानून है। केंद्र का कानून वहां सीधे तौर पर लागू नहीं हो पाएगा।
फिर भी बदले हालात के संदर्भ में विकास की जरूरतों के हिसाब से हम अपने कानून में संशोधन कर सकते हैं। जम्मू कश्मीर दलबदल और भूमि अधिग्रहण पर कानून बनाने में अगुआ रहा है।
सिर्फ मुआवजा ही नहीं रोजगार भी दें
मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघवाद को बढ़ावा देने की नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्यों को बराबरी का पार्टनर बनाना होगा। कुछ राज्यों ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में प्रस्तावित संशोधनों पर ऐतराज जाहिर किया है।
उनकी कुछ बाध्यताएं हो सकती हैं लेकिन किसी भी हालत में निवेश के माहौल पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए। संशोधनों को किसान विरोधी बताने वालों की भी सलाह लेनी चाहिए।
जम्मू कश्मीर विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौती झेल रहा है। सभी क्षेत्रों के समान विकास के लिए सर्वसम्मति से ही नीतियां तय की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे के विस्तार प्रोजेक्ट और नेशनल हाईवे विस्तार के लिए भूमि लिए जाने के क्रम में मुआवजे के अलावा रोजगार की भी व्यवस्था जरूरी है।
जमीन देने वालों को जीविका के लिए आर्थिक सुरक्षा भी जरूरी है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने कहा कि रेलवे विस्तार के लिए भूमि देने वालों को नौकरी की बात उठाई गई है।