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ऑपरेशन पहचान: पाकिस्तान-नेपाल सीमा के पास भी जनसांख्यिकीय बदलाव की साजिश, भारत विरोधी मंसूबों में चीन भी शामिल
Sat, 25 Jul 2026 04:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अभिषेक राज, श्रीनगर
अभिषेक राज, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 25 Jul 2026 04:04 AM IST
सार
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से लगते इलाकों में घुसपैठ, फर्जी पहचान और सुनियोजित बसावट के जरिए जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने की साजिश हो रही है।
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चीन-पाकिस्तान की भारत के खिलाफ बड़ी साजिश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा देश की आंतरिक सुरक्षा का सबसे संवेदनशील भूगोल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से लगते इलाकों में घुसपैठ, फर्जी पहचान और सुनियोजित बसावट के जरिए जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने की साजिश हो रही है।
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इसमें पाकिस्तान के साथ ही चीन के भी शामिल होने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों को इसके प्रमाण भी मिले हैं, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेपाल, बांग्लादेश व पाकिस्तान बॉर्डर पर विशेष जांच अभियान शुरू किया है। केंद्रीय टीम का जोर जम्मू-कश्मीर से लगती एलओसी व आईबी के आसपास के क्षेत्रों पर है। ये वही क्षेत्र हैं जहां से सर्वाधिक नशा व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते हैं।
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बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को इन क्षेत्रों में आबाद कराने के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई गई है। इस व्यापक बदलाव को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा माना जा रहा है। जनसांख्यिकीय बदलाव के मामले में नेपाल सीमा के बाद दूसरे स्थान पर जम्मू-कश्मीर से लगता पाकिस्तान बॉर्डर सबसे संवेदनशील बना हुआ है। इस बदलाव की जांच के लिए गठित केंद्रीय टीम को जमीनी आकलन एवं क्षेत्रीय दौरों के समय बॉर्डर से चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं।
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जम्मू का सबसे बुरा हाल
सांबा, कठुआ, राजौरी, पुंछ, बारामुला, कुपवाड़ा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ सबसे तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव जम्मू शहर व आसपास दर्ज किया गया है। यहां के इस बदलाव को सुरक्षा एजेंसियों ने सुनियोजित माना है। इन्हें बड़े पैमाने पर राजनीतिक संरक्षण भी मिला है।
नेपाल के बदलाव से भारत भी चिंतित
नेपाल के सीमावर्ती जिलों में तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव से भारत भी अब चिंतित हो गया है। 26 जनवरी 2022 को जारी नेपाल की जनगणना के अनुसार 2012 से 22 के मध्य के वर्षों में नेपाल का पूरा समीकरण बदला है। मूल गोरखा आबादी में 18,860 की कमी आई है। वहीं, भारत से लगते नेपाली जिले कैलाली और कंचनपुर की जनसंख्या वृद्धि दर सामान्य पहाड़ी जिलों के 0.93 के सापेक्ष 1.54 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार कंचनपुर की वार्षिक वृद्धि दर 1.32 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह वृद्धि स्थानीय लोगों की नहीं है। इनमें सर्वाधिक संख्या बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की बताई जा रही है।
एक्सपर्ट कमेंट
सीमावर्ती क्षेत्रों में बसावट में होने वाला बदलाव बेहद संवेदनशील है। यह पहचान सत्यापन, भूमि और दस्तावेजी निगरानी की स्थिति को भी दर्शाता है। गृह मंत्रालय की सख्ती के बाद अब जांच का सिलसिला तेज हुआ है।
-आर संदीपन, सुरक्षा विशेषज्ञ
कश्मीर में 30% तक बढ़ी आबादी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नियंत्रण रेखा से लगे कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा, बारामुला और बांदीपोरा जिलों में बीते 20 वर्षों में जनसंख्या वृद्धि 25 से 30 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। एजेंसियों का मानना है कि एलओसी से लगे जिलों के जनसांख्यिकीय रुझानों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। वहीं जम्मू संभाग में आईबी से लगे कठुआ व सांबा भौगोलिक स्थिति के कारण संवेदनशील हैं। यहां आबादी में 30 से 35 प्रतिशत तक बदलाव देखा गया है। इनमें अधिकतर बाहर से आए हुए परिवार हैं।