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मसर्रत मामले में सरकार को अंतिम मौका

Mon, 31 Aug 2015 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 31 Aug 2015 10:17 AM IST
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pil on publicity to masarat alam

अलगाववादी नेता मसर्रत आलम के संबंध में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर और जस्टिस बीएस वालिया की खंडपीठ ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया तथा सरकार को जवाब देने का अंतिम मौका दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है।

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मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील एसएस लहर और आदित्य शर्मा ने दलील दी कि एक अंजान व्यक्ति को मीडिया ने अलगाववादियों का नेता बना दिया।

उनका कहना था कि घाटी के एक कोने में लगभग सौ लोगों ने रैली कर पाकिस्तान के झंडे लहराने के अलावा भारत विरोधी नारे लगाए, लेकिन मीडिया ने उसे इस ढंग से पेश किया, जैसे पूरी कश्मीर घाटी राष्ट्र विरोधी है।
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मीडिया ने गांधी जी, भगत सिंह और अन्य का जीवन इतिहास बताने की बजाय मसर्रत आलम के जीवन को ऐसे प्रसारित किया, जैसे वह स्वतंत्रता सेनानी या राष्ट्र नेता हो।
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एडवोकेट ने अदालत से अपील की कि प्रेस काउंसिल आफ इंडिया और सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिएं, ताकि भविष्य में इस तरह के गलत लोगों को समाचार के रूप में ऐसे पेश न किया जाए। इस संबंध में अदालत ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया और सरकार से जवाब मांगा था, लेकिन अभी तक उन्होंने पक्ष नहीं रखा है।

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