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मिसाल: जब 100 दिन की हिंसा से भी नहीं हारी कश्मीरियत

Sun, 16 Oct 2016 01:39 PM IST
ओमपाल सांब्याल,अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल सांब्याल,अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 16 Oct 2016 01:39 PM IST
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people shown sympathy even in the days of kashmir unrest
kashmir - फोटो : File Photo

आतंकी बुरहान वानी की मौत पर भड़की हिंसा में भी कश्मीरियत ने अपना किरदार नहीं छोड़ा। सुरक्षा बलों पर हमले, अमरनाथ यात्रा पर पथराव और अल्पसंख्यक पंडित कालोनियों को निशाना बनाने की साजिशों के बावजूद कश्मीरियत कमजोर नहीं पड़ी।

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कभी अमरनाथ यात्रियों के दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे लोगाें को बचाने की मिसाल सामने आई तो कभी सड़क हादसे से मौत के मुंह में फंसे सेना के जवान को बचाने के लिए कश्मीरियत बेचैन हो उठी। 
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सौ दिनों की हिंसा के दौरान ऐसे कई लम्हे आए जब उपद्रव और उन्मादी माहौल में भी कश्मीरी अवाम ने अपनी मेहमाननवाजी की पहचान को मिटने नहीं दिया। 
 

कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी में मुस्लिमों ने की मेजबानी

people shown sympathy even in the days of kashmir unrest
changes in indian weddings

दो ही दिन पहले दक्षिण कश्मीर में कश्मीरी पंडित जोड़े की शादी में मुस्लिम और सिख पड़ोसियों ने वर और वधू पक्ष के लिए मेजबानी की। शादी से जुड़े लोक संगीतों की स्वर लहरियों में इस कदर धमाल मचाया कि महफिल ही चुरा ली।

ऐसे बीसियों वाकये सामने आए जहां बंद और हिंसा से इतर कश्मीरियत जरूरतमंदों के लिए सहारा बनती नजर आई। कर्फ्यू और बंद की पाबंदियों के बीच किसी ने स्कूली बच्चों के लिए कम्युनिटी स्कूल खोल दिए तो किसी ने घर घर खाना पहुंचाने के लिए टीम तैयार कर ली। 

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