जम्मू-कश्मीर: टारगेट किलिंग के खिलाफ कश्मीर के लोगों में गुस्सा, शहर में सुरक्षा बढ़ाई, लाल चौक पर निकाला कैंडल मार्च, देखिए तस्वीरें
घाटी में लगातार हो रही टारगेट किलिंग के खिलाफ स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। उन्होंने श्रीनगर में मारे गए सेल्समैन और पुलिस कर्मी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
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घाटी में टारगेट किलिंग के खिलाफ स्थानीय लोग खड़े हुए हैं। मंगलवार को लोगों ने लाल चौक पर कैंडिल मार्च निकालकर गुस्सा जताया। साथ ही श्रद्धांजलि अर्पित की। आखिर कब तक विरोध प्रदर्शन लाल चौक के घंटा घर पर किया गया। इस बीच शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं, कश्मीरी पंडित कारोबारी डा. संदीप मावा ने कहा है कि खतरे के बाद भी वह और उनका परिवार कश्मीर छोड़ने वाला नहीं है। ज्ञात हो कि शहर के बोरीकदल इलाके में सोमवार को आतंकियों ने कश्मीरी पंडित कारोबारी डा. मावा के सेल्समैन इब्राहिम खान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। संदीप ने कहा कि वह और उसके पिता रोशन लाल मावा आतंकियों के असल टारगेट हैं, जिन्होंने इब्राहिम की हत्या कर दी थी।
उनका परिवार डरा हुआ है, लेकिन वह कश्मीर छोड़ने वाले नहीं हैं। वह न तो कश्मीर छोड़ने वाले हैं और न ही बंदूक से चुप रहने वाले हैं। कहा कि उनके पास एक एसयूवी गाड़ी है। दोपहर बाद तीन बजे पुलिस ने फोन कर बताया कि वह टारगेट हो सकते हैं। इस वजह से वे अपनी छोटी कार में घर चले गए। इब्राहिम रात आठ बजे एसयूवी लेने गया। आतंकी पहले से ही घात लगाए हुए थे। उन्होंने मुझे समझकर चार गोलियां इब्राहिम को मार दी। संदीप ने बताया कि हत्यारे बोरीकदल में कारोबार वाले स्थान के आसपास घूम रहे थे। इब्राहिम उसके पास पिछले 15 साल से काम कर रहा था। मुझे यह नहीं समझ आ रहा कि उसके परिवार का सामना कैसे करेंगे क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी वजह से उसकी जान गई।
घटना की जिम्मेदारी मुस्लिम जाबांज फोर्स ने ली
घटना की जिम्मेदारी मुस्लिम जाबांज फोर्स ने ली है। उसने उर्दू में लिखे पत्र में दावा किया है कि संदीप तथा उसके पिता रोशन लाल मावा असल टारगेट थे। दोनों भारतीय एजेंसियों के लिए काम करने के साथ ही गैर कश्मीरियों को घाटी में लाने में शामिल थे। पुलिस पत्र की वास्तविकता की जांच कर रही है।
मावा के पिता को भी आतंकियों ने 90 में मारी थी गोली
संदीप के पिता रोशन लाल मावा को आतंकियों ने 1990 के दशक में भी गोली मारी थी। उन्हें जम्मू और दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया था। 2019 में वह घाटी लौट आए। संदीप ने बताया कि उसके पिता दिल्ली में हैं। वह श्रीनगर में अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ हैं। ताजा घटना से परिवार डरा हुआ है, लेकिन वे उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं। वह कश्मीर नहीं छोड़ेंगे।