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नए कश्मीर में अलगाववादियों को तवज्जो नहीं, लोग घाटी में विरोधी पोस्टरों पर नहीं दे रहे हैं ध्यान
Thu, 22 Aug 2019 11:24 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 22 Aug 2019 11:24 PM IST
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हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में बदले हालात से अलगाववादी भी अलग-थलग पड़ गए हैं। नए जम्मू-कश्मीर में अब उनके कैलेंडर को आम कश्मीरियों ने नजरअंदाज कर दिया है। फैसले के बाद अलगाववादियों के आह्वान के बावजूद न तो कश्मीरियों ने विरोध प्रदर्शन किया और न ही यूएन दफ्तर तक मार्च की अपील को तवज्जो दे रहे हैं।
अलगाववादियों के ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) का एक पोस्टर श्रीनगर के पुराने शहर के सोवरा इलाके में लगाया गया था। इसमें शुक्रवार को यूएन दफ्तर चलो मार्च का आह्वान किया गया है लेकिन इस पोस्टर पर इधर से गुजरने वाले रहे लोग भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति अली मोहम्मद से जब पूछा गया कि क्या शुक्रवार को कोई कॉल है तो उसने बताया कि हम गरीब लोग हैं। हमें ऐसे समय में दो वक्त की रोटी कमाने की चिंता है। दिन में तो युवा दुकानें खोलने नहीं देते। सुबह-सुबह दुकान खुलती है तो थोड़ी-बहुत बिक्री हो जाती है। हमें तो बस अपनी दुकानदारी से मतलब है।
इससे पहले अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध करने के लिए अलगाववादियों की ओर से कैलेंडर जारी किया गया था। आठ अगस्त को एक पोस्ट राजबाग इलाके में देखा गया था। इसमें सिलसिलेवार ढंग से जिक्र था किस दिन कहां और किस तरह का विरोध प्रदर्शन करना है। बकरीद से पहले भी श्रीनगर के पुराने शहर और बटमालू इलाके में कुछ पोस्टर मिले थे लेकिन इन पोस्टरों का कोई असर आम लोगों में नहीं दिखा। छिटपुट पत्थरबाजी की घटना को छोड़कर कहीं भी व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन नहीं हुए।
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अलगाववादियों के ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) का एक पोस्टर श्रीनगर के पुराने शहर के सोवरा इलाके में लगाया गया था। इसमें शुक्रवार को यूएन दफ्तर चलो मार्च का आह्वान किया गया है लेकिन इस पोस्टर पर इधर से गुजरने वाले रहे लोग भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति अली मोहम्मद से जब पूछा गया कि क्या शुक्रवार को कोई कॉल है तो उसने बताया कि हम गरीब लोग हैं। हमें ऐसे समय में दो वक्त की रोटी कमाने की चिंता है। दिन में तो युवा दुकानें खोलने नहीं देते। सुबह-सुबह दुकान खुलती है तो थोड़ी-बहुत बिक्री हो जाती है। हमें तो बस अपनी दुकानदारी से मतलब है।
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इससे पहले अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध करने के लिए अलगाववादियों की ओर से कैलेंडर जारी किया गया था। आठ अगस्त को एक पोस्ट राजबाग इलाके में देखा गया था। इसमें सिलसिलेवार ढंग से जिक्र था किस दिन कहां और किस तरह का विरोध प्रदर्शन करना है। बकरीद से पहले भी श्रीनगर के पुराने शहर और बटमालू इलाके में कुछ पोस्टर मिले थे लेकिन इन पोस्टरों का कोई असर आम लोगों में नहीं दिखा। छिटपुट पत्थरबाजी की घटना को छोड़कर कहीं भी व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन नहीं हुए।
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