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Jammu News: पीरखो रोपवे सेवा ठप, अधर में 27 करोड़ की परियोजना
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- मुबारक मंडी को पीरखो-महामाया-बाहु रोपवे से जोड़ने का सपना अधूरा
- बाढ़ के बाद सुध लेना भूल गए अधिकारी, पांच माह से बंद पड़ा पीरखो–महामाया सेक्शन
जम्मू। बाढ़ से ध्वस्त हुआ 27 करोड़ का पीरखो-महामाया रोपवे प्रोजेक्ट आज तक शुरू नहीं हो सका। पर्यटन को बुलंदियों पर ले जाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना अधिकारियों की उदासीनता की भेंट चढ़ी है। अगर पांच महीने में सकारात्मक प्रयास किया जाता तो रोपवे सेवा चालू हो सकती थी।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक मुबारक मंडी परिसर को पीरखो, महामाया और बाहु किले से जोड़ना था, ताकि मंदिरों के शहर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। इसके बावजूद काम शुरू नहीं करवाया गया। पीरखो-महामाया सेक्शन पर काम करने वाले अशोक कुमार बताते हैं कि करीब सात कर्मचारी कार्यरत हैं। बाढ़ की वजह से रोपवे सेक्शन का काफी नुकसान हुआ। इसे चालू करने के लिए मरम्मत कार्य जारी है जो एक से दो माह में पूरा हो सकता है।
स्थानीय निवासी मनोज कुमार, विनोद कुमार मेहरा व प्रिंस सहित अन्य लोगों का कहना है कि बाढ़ से पहले भी रोपवे को अक्सर यात्रियों और पर्यटकों की संख्या में कमी का हवाला देकर बंद रखा जाता था। जबकि करोड़ों की परियोजना का उद्देश्य ही शहर में पर्यटन को नए आयाम देना था। प्रोजेक्ट के प्रति संबंधित अधिकारी इतने गंभीर है कि फोन पर जवाब देना उचित नहीं समझते।
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निविदाओं में उलझी वर्टिकल लिफ्ट परियोजना
पर्यटन को बढ़ावा देने की वर्टिकल लिफ्ट परियोजना कुछ साल से निविदा प्रक्रिया में अटकी हुई है। 27 करोड़ रुपये की परियोजना को सितंबर 2023 में प्रशासनिक परिषद से मंजूरी मिली थी। ऐतिहासिक मुबारक मंडी को पीरखो-महामाया-बाहु रोपवे से जोड़ा जाना था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया। इसके लिए जेके ई-निविदा पोर्टल पर कई बार निविदा जारी की गई थी।
रोपवे की रस्सी कस दी गई है। स्पेयर पार्ट का ऑर्डर दिया जा चुका है। परीक्षण पूरा होने के बाद रोपवे को चालू कर दिया जाएगा।
- सैयद कमर सज्जाद, प्रबंध निदेशक, जेके केबल कार निगम।
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- बाढ़ के बाद सुध लेना भूल गए अधिकारी, पांच माह से बंद पड़ा पीरखो–महामाया सेक्शन
जम्मू। बाढ़ से ध्वस्त हुआ 27 करोड़ का पीरखो-महामाया रोपवे प्रोजेक्ट आज तक शुरू नहीं हो सका। पर्यटन को बुलंदियों पर ले जाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना अधिकारियों की उदासीनता की भेंट चढ़ी है। अगर पांच महीने में सकारात्मक प्रयास किया जाता तो रोपवे सेवा चालू हो सकती थी।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक मुबारक मंडी परिसर को पीरखो, महामाया और बाहु किले से जोड़ना था, ताकि मंदिरों के शहर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। इसके बावजूद काम शुरू नहीं करवाया गया। पीरखो-महामाया सेक्शन पर काम करने वाले अशोक कुमार बताते हैं कि करीब सात कर्मचारी कार्यरत हैं। बाढ़ की वजह से रोपवे सेक्शन का काफी नुकसान हुआ। इसे चालू करने के लिए मरम्मत कार्य जारी है जो एक से दो माह में पूरा हो सकता है।
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स्थानीय निवासी मनोज कुमार, विनोद कुमार मेहरा व प्रिंस सहित अन्य लोगों का कहना है कि बाढ़ से पहले भी रोपवे को अक्सर यात्रियों और पर्यटकों की संख्या में कमी का हवाला देकर बंद रखा जाता था। जबकि करोड़ों की परियोजना का उद्देश्य ही शहर में पर्यटन को नए आयाम देना था। प्रोजेक्ट के प्रति संबंधित अधिकारी इतने गंभीर है कि फोन पर जवाब देना उचित नहीं समझते।
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निविदाओं में उलझी वर्टिकल लिफ्ट परियोजना
पर्यटन को बढ़ावा देने की वर्टिकल लिफ्ट परियोजना कुछ साल से निविदा प्रक्रिया में अटकी हुई है। 27 करोड़ रुपये की परियोजना को सितंबर 2023 में प्रशासनिक परिषद से मंजूरी मिली थी। ऐतिहासिक मुबारक मंडी को पीरखो-महामाया-बाहु रोपवे से जोड़ा जाना था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया। इसके लिए जेके ई-निविदा पोर्टल पर कई बार निविदा जारी की गई थी।
रोपवे की रस्सी कस दी गई है। स्पेयर पार्ट का ऑर्डर दिया जा चुका है। परीक्षण पूरा होने के बाद रोपवे को चालू कर दिया जाएगा।
- सैयद कमर सज्जाद, प्रबंध निदेशक, जेके केबल कार निगम।