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यहां पढ़ें, मसर्रत आलम की रिहाई का आदेश

Tue, 10 Mar 2015 04:34 PM IST
Updated Tue, 10 Mar 2015 04:34 PM IST
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PDP shifts blame, says decision taken during Governor's rule in J&K

अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। अब तक आलम की रिहाई के लिए सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था लेकिन मामले में नया खुलासा हुआ है। खबर है कि आलम की रिहाई के आदेश मुफ्ती ने नहीं दिए।

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रिहाई की प्रक्रिया राज्यपाल शासन के दौरान ही शुरू हो गई थी और रिहाई के आदेश केंद्र से आए थे। मसर्रत के खिलाफ नए आरोप दर्ज न किए जाने का फैसला मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार सत्ता में आने से करीब दस दिन पहले ही हो गया था। मामले में अब केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी हो गई है।
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आलम पर कोई मामला नहीं!

PDP shifts blame, says decision taken during Governor's rule in J&K

आलम की रिहाई की रूप रेखा 49 दिनों के राज्यपाल शासन के दौरान तैयार की गई थी। सूत्रों का कहना है कि, फरवरी में गृह राज्य मंत्री सुरेश कुमार ने जम्मू के डीएम को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि, आलम के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत लगे आरोप खारिज हो चुके हैं इसलिए आलम को कैद में नहीं रखा जा सकता।

पत्र के मुताबिक पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत आलम के खिलाफ लगे आरोपों को गृह राज्य मंत्रालय ने 12 दिनों के भीतर कंफर्म नहीं किया था। बता दें कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत लगे इस तरह के आरोपों को गृह राज्य मंत्रालय द्वारा 12 दिनों के भीतर कंफर्म किया जाना अनिवार्य होता है।

आलम के मामले को अडवाइजरी बोर्ड ने भी तय अवधि के भीतर एप्रूव नहीं किया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, डीएम ने गृह मंत्रालय से कहा था कि आलम के खिलाफ कोई नए आरोप नहीं हैं। नए आरोप न होने के कारण आलम के खिलाफ केस बंद हो गया।

मसरत आलम की रिहाई ने पीडीपी-भाजपा गठबंधन में सियासी तूफान ला दिया है। आलम पर साल 2010 के चुनाव के दौरान लोगों को भड़काने का आरोप था जिसमें सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। पिछले चार सालों से मसर्रत आलम को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत कई बार जेल जा चुका है।

भाजपा ने कहा, टूट सकता है गठबंधन

PDP shifts blame, says decision taken during Governor's rule in J&K

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई मामले पर हुई किरकिरी के बाद भाजपा ने रियासत की मुफ्ती सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। एक टीवी चैनल के अनुसार, भाजपा ने कहा है कि अब और कैदियों की रिहाई न हो। किसी अन्य कैदी की रिहाई हुई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

पीडीपी से एक और गलती हुई तो रिश्ता टूट भी सकता है। वैसे मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 15 ऐसे कैदी हैं, जिनकी रिहाई पर मुफ्ती सरकार विचार कर रही है। उधर, भाजपा पर संघ परिवार का भी भारी दबाव है, जिसके चलते भाजपा ने पीडीपी को यह चेतावनी दी है।

वैसे, भाजपा की ओर से यह भी साफ किया जा रहा है कि मसर्रत की रिहाई 4 फरवरी को ही तय हो गई थी, जब राजयपाल शासन था और ऐसे व्यक्ति की रिहाई में तकनीकी रूप से कुछ भी गलत नहीं है। इस मामले को जिस तरह मुफ्ती सरकार ने डील किया, उससे भाजपा नाराज है।

खबर है कि मुफ्ती अन्य कैदियों को भी रिहा करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें जेकेएलएफ, हुर्रियत के गिलानी गुट, मीरवाइज गुट, शब्बीर शाह समेत अन्य गुटों के नेता शामिल हैं। फकटू पर मानवाधिकार कार्यकर्ता एचएन वांचू की भी हत्या का आरोप है। पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत 30 से ज्यादा आरोपी जेल में बंद हैं।

इस बीच मसर्रत आलम ने फिर जहरीला बयान दिया है। उसने कहा कि ‘कुर्बानी खाली नहीं जाएगी। हम आजादी लेकर रहेंगे।’ उधर दिल्ली में पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने अलगाववादी नेता एसएएस गिलानी से मुलाकात की है।

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