J&K By-election Results: नगरोटा में भाजपा ने बरकरार रखी साख, बडगाम में पीडीपी की जीत से एनसी को लगा तगड़ा झटका
जम्मू-कश्मीर के उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा झटका लगा, बडगाम में पीडीपी और नगरोटा में भाजपा ने जीत हासिल की। इससे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की सियासी हसरतों पर असर पड़ा।
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बिहार चुनाव के साथ ही जम्मू-कश्मीर उपचुनाव के नतीजे भी शुक्रवार को घोषित हो गए। पीडीपी ने बडगाम सीज कब्जा ली और नगरोटा में भाजपा सिरमौर रही। उपचुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ दल और खासकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तगड़ा झटका दिया है। नेशनल कांफ्रेंस दोनों ही सीटें हार गई। पीडीपी और भाजपा जीत का जश्न मना रही हैं तो जम्मू से लेकर कश्मीर तक सत्तारूढ़ दल के खेमे में मायूसी छाई है।
भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की नगरोटा विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। 30 वर्षीय देवयानी राणा ने 24,647 वोटों की बढ़त के साथ जीत हासिल की है। शुरुआत से ही बढ़त बनाए हुए देवयानी राणा ने 42,350 वोट हासिल किए और जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के उम्मीदवार हर्ष देव सिंह को हराया, जिन्हें 17,703 वोट मिले। नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम बेगम 10,872 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं बडगाम में पीडीपी प्रत्याशी आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने 21,576 वोट हासिल कर 4,478 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। जबकि एनसी प्रत्याशी आगा सैयद महमूद को 17,098 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी आगा सैयद मोहसिन को 2,619 वोट मिले।
नगरोटा में विरासत बची, बडगाम में रुहुल्ला की नराजगी भारी पड़ी
नगरोटा में देव्यानी राणा ने दिवंगत पिता और पार्टी के वरिष्ठ नेता देविंदर सिंह राणा की विरासत को आगे बढ़ाया है। भाजपा ने पूरी प्रतिष्ठा इस सीट पर लगा दी थी। संगठन की ताकत के साथ ही सहानुभूति फैक्टर की जुगलबंदी पार्टी की प्रतिष्ठा और देव्यानी की जीत का कारण बनी।
जबकि बडगाम में रुहुल्ला की नाराजगी के साथ ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली के प्रति नाराजगी एन -सी पर भारी पड़ गई। उमर ने उन्हें मनाने की कोशिश भी नहीं की और रुहुल्ला ने क्षेत्र से दूरी बनाई और जर्मनी चले गए। उनके समर्थकों को यह एक संदेश की तरह ही देखा जा रहा है। दूसरी तरफ क्षेत्र के लोगों से बिना बात किए बडगाम को छोड़ देने पर लोगों ने अपनी नाराजगी को एनसी को हराकर जारी कर दी।
उपमुख्यमंत्री की सियासी हसरतों पर असरनगरोटा में एनसी की तगड़ी हार उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की सियासी हसरतों पर भी असर डालेगी। वे शुरु से ही नगरोटा के चुनाव मैदान में नजर आ रह थे। लगातार आक्रामक प्रचार और अपनी सियासी बयानबाजी के चलते सुर्खियों में थे। उनकी आक्रामक रणनीति भी एनसी प्रत्याशी को जिता नहीं सकी।