बाजी फिसलती देख राजभवन दौड़े राम माधव
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की मुलाकात के बाद से तेजी बदले समीकरण ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। राज्यसभा चुनाव में नेकां और कांग्रेस के बीच गठबंधन ने भाजपा और पीडीपी को चौकन्ना किया। बाजी हाथ से फिसलती देख भाजपा महासचिव राम माधव राजभवन दौड़ने पर मजबूर हुए।
उन्होंने गवर्नर के सामने सरकार गठन की दिशा में हुई प्रगति का ब्योरा पेश किया। पीडीपी महकमे में भी सक्रियता बढ़ी और सियासी उधेड़बुन के बादल छंटते दिखे। ताजा समीकरणों के बाद भाजपा और पीडीपी ने शीघ्र सरकार गठन के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 फरवरी को आने के बाद दूसरे सप्ताह में जम्मू कश्मीर में नई सरकार के गठन के संकेत हैं।
दरअसल, भाजपा और पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए आपसी समझ के आधार पर अघोषित तालमेल कर लिया है। इसके तहत बिना शोर किए राज्यसभा की सभी चार सीटों पर कब्जा करने की योजना थी। इसी रणनीति के तहत भाजपा और पीडीपी ने दो-दो प्रत्याशी घोषित किए और एक-दूसरे के प्रत्याशियों के खिलाफ उम्मीदवार नहीं देकर जीत की राह आसान की।
नेकां ने फारूक अब्दुल्ला के नाम कांग्रेस का समर्थन मांगा
इस बीच नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस में गठबंधन के प्रयास तेज हो गए। पहले नेकां ने फारूक अब्दुल्ला के नाम कांग्रेस का समर्थन मांगा। कांग्रेस ने फारूक के खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर अपने लिए समर्थन मांगा। पहले उमर हालांकि, आजाद के नाम पर समर्थन को तैयार नहीं थे।
बाद में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फोन पर उमर से बातचीत कर सोनिया से उनकी मुलाकात तय कराई। सोनिया-उमर बैठक के बाद गठबंधन तय हो गया। आजाद संयुक्त प्रत्याशी बने और नेकां ने दो और प्रत्याशी खड़े कर भाजपा-पीडीपी की मुश्किलें बढ़ा दीं।
तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद भाजपा आलाकमान की सक्रियता बढ़ी। इससे पहले भाजपा की पीडीपी से बातचीत कई दौर में हो चुकी थी। मंगलवार की रात को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की फोन पर पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद से बातचीत हुई। इसके बाद भाजपा नेताओं की गवर्नर से मुलाकात तय हुई।
आजाद को करना पड़ा नेकां नेताओं का इंतजार
भाजपा सूत्रों की मानें तो भाजपा ने राज्यपाल एन एन वोहरा को बता दिया है कि पीडीपी के साथ गठबंधन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार हो गया है। फरवरी के दूसरे सप्ताह में पीडीपी और भाजपा के नेता एक साथ गवर्नर से मिलकर सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं।
राम माधव ने भाजपा विधायकों की बैठक में भी इसके संकेत दिए। उधर, पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर ने भी कहा है कि भाजपा से बातचीत अंतिम चरण में है। गठबंधन सरकार का गठन शीघ्र संभव है।
नेकां और कांग्रेस के गठबंधन ने भले ही भाजपा-पीडीपी को भयभीत किया हो लेकिन गुलाम नबी आजाद को समर्थन के मुद्दे पर नेकां में सहमति बड़ी मुश्किल से बनी। विधानसभा चुनाव में उमर और आजाद के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई थी।
उमर ने सोनिया के आग्रह पर आजाद को समर्थन का मन बनाया। नामांकन के वक्त उमर नहीं पहुंचे और आजाद को नेकां के अन्य नेताओं का एक घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा।
बाद में नेकां के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र राणा और पूर्व मंत्री अजय सडोत्रा समेत अन्य नेकां नेता आए। तब आजाद ने पर्चा भरा। इस क्रम में एक दस्तावेज पर आजाद हस्ताक्षर करना ही भूल गए। बाद में उन्होंने दस्तावेज पर दस्तखत किए।