मसर्रत के बहाने कश्मीर में पाक की साजिश
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गिलानी के चेले मसर्रत आलम को लेकर घाटी में उपजे तनाव के पीछे कश्मीर पर पाक ने सोची समझी साजिश रची है। पाकिस्तान अलगाववाद को बढ़ावा देकर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर कश्मीर समस्या को उठाने की कोशिश कर रहा है। सीमा पार बैठे हाफिज सईद और सलाहुद्दीन जैसे खूंखार आतंकी खुलकर अलगाववादियों का पक्ष ले रहे हैं।
त्राल में फायरिंग से उत्पन्न हालात को लेकर शनिवार को हुर्रियत के कश्मीर बंद के आह्वान को समर्थन देकर आतंकवादियों ने यह जताने की कोशिश की है कि कश्मीर में सीमा पार से मिल रहे निर्देश पर ही हालत खराब किए जा रहे हैं। गिलानी के कश्मीर पहुंचने के दिन से ही अलगाववादी ताकतों में फिर एकजुटता दिख रही है।
चुनावी नतीजों से बौखलाया है पाक
2010 में भी गिलानी ने रैली कर कश्मीर के हालात बिगाड़े थे। उस दौरान हिंसक प्रदर्शनों में 112 युवकों की मौत हो गई थी। एक बार फिर सीमा पार से मिल रहे निदेशों पर कश्मीर में अलगाववादी ताकतें और आतंकी संगठन माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में लोकतंत्र के प्रति लोगों की दीवानगी देखकर तथा हाल में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर शुरू किए गए प्रयास से न केवल अलगाववादी बल्कि पाकिस्तान भी बौखला गया है। उसे अपनी मंशा नाकाम होती नजर आ रही है।
कश्मीर मसले को लेकर लगातार मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान एक बार इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच उछालने की कोशिश में है। इसके लिए उसने अलगाववादियों को हथियार बनाया है।
रैली के पीछे पाकिस्तानी दिमाग
बताया जा रहा है कि गिलानी की पांच साल बाद बीते मंगलवार को हुई रैली की तैयारियां काफी पहले से ही चल रहीं थीं। एक सोची समझी साजिश के तहत ही रैली में पाकिस्तानी झंडे लहराए गए और भारत विरोधी और पाकिस्तान परस्त नारे लगाए गए।
घाटी में उपजे तनाव के बीच राज्य सरकार का दावा है कि किसी भी हालत में स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी। हर हाल में कानून का पालन होगा।
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह दोनों ने ही कहा है कि सरकार स्थितियों पर पैनी नजर रख रही है। कानून व्यवस्था की स्थिति खराब करने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी।