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पाकिस्तान की कश्मीर मुद्दे को फिर हवा देने की कोशिश

Sun, 09 Aug 2015 10:46 AM IST
Updated Sun, 09 Aug 2015 10:46 AM IST
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pakistan is trying to raise Kashmir issue at international level

राष्ट्रमंडल संसदीय एसोसिएशन (सीपीए) की बैठक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को न बुलाए जाने का ताजा विवाद पाकिस्तान की नापाक मंशा को स्पष्ट कर रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवा देने की कोशिश कर रहा है।

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उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों में फिर से वार्ता शुरू करने की सहमति पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को रास नहीं आई। इसके चलते इसी महीने दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले इस्लामाबाद के नए पैंतरे सामने आ रहे हैं।
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अब पाकिस्तान की ओर से रियासत के विधानसभा अध्यक्ष को सीपीए की बैठक में नहीं बुलाने के निर्णय ने पाकिस्तान को एकबार फिर बेनकाब कर दिया है। सीपीए संविधान के अनुसार प्रत्येक सदस्य इसमें भाग लेने का अधिकारी है।
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भारत की ओर से सीपीए के क्षेत्रिय अधिकारी की ओर से सीपीए के कार्यकारी जनरल सेक्रेटरी को अप्रैल के महीने में यह जानकारी दी गई थी कि जम्मू कश्मीर ब्रांच को छोड़कर सभी ब्रांच को न्योता भेजा जा चुका है।

यह बैठक सरकारी बैठक नहीं है, सीपीए कांफ्रेंस है

pakistan is trying to raise Kashmir issue at international level

एक जून को पाकिस्तान के स्पीकर तथा सीपीए के अध्यक्ष को पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर ब्रांच को भी न्योता भेजने का आग्रह किया था। 8 जून को इंटरनेशनल सीपीए के चेयरपर्सन को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने को कहा था।

पत्र में कहा गया था कि कोई सदस्य निलंबित नहीं है तो उसे अनिवार्य रूप से बैठक में शामिल किया जाना चाहिए। 29 जून को पाकिस्तान की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि जम्मू कश्मीर को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा और पाकिस्तान की विदेश नीति के विपरीत होगा।

बताते हैं कि पाकिस्तान के इस रवैये का विभिन्न देशों के सदस्यों ने भी लिखित विरोध दर्ज कराया है। इसमें कहा गया है कि यह बैठक सरकारी बैठक नहीं है, बल्कि सीपीए कांफ्रेंस है। यदि भारत ने बहिष्कार का फैसला किया तो इसका असर अन्य सदस्यों पर भी पड़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता का कहना है कि पाकिस्तान का नजरिया हमेशा से कश्मीर के प्रति नकारात्मक रहा है। वह किसी भी सूरत में यहां शांति तथा विकास नहीं चाहता है।

ताजा मसले को इसी आलोक में देखा जाना चाहिए। वास्तव में कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर औंधे मुंह गिरने के बाद एक बार फिर वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच जिंदा करना चाहता है।

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