सीमा पर साजिश: रेतीली व दोमट मिट्टी के टीलों में सुरंगें खोद जम्मू-कश्मीर में आतंकी भेज रहा पाकिस्तान
सांबा सेक्टर की चक फकीरा बॉर्डर आउट पोस्ट के नजदीक बीएसएफ के विशेष तलाशी अभियान में एक सुरंग मिली है। इसके बाद पूरे इलाके में छानबीन तेज कर दी है।
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सीमा पर लगाई गई तारबंदी का सुरक्षा घेरा तोड़ने में नाकाम पाकिस्तान सांबा जिले की भौगोलिक स्थितियों को घुसपैठ के लिए इस्तेमाल कर रहा है। सरकंडे की आड़ और रेतीली व दोमट मिट्टी के नीचे सुरंग खोदकर आतंकी भेजे जा रहे हैं। बुधवार को सांबा बॉर्डर पर चक फकीरा पोस्ट के पास जो सुरंग मिली है, उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी ही है। यहां भी रेतीली, दोमट मिट्टी के टीले हैं, जहां पानी का रिसाव होने का खतरा नहीं रहता।
जमीन के नीचे खोदाई कर लंबी सुरंग बनाई गई
जमीन के नीचे खोदाई कर लंबी सुरंग बनाई गई है, जिससे आतंकी घुसपैठ की भी आशंका है। इससे पूर्व 29 अगस्त 2020 में चक फकीरा पोस्ट से तीन किलोमीटर दूर बैनगलाड में भी सुरंग मिली थी। बैनगलाड के बाद 22 नवंबर 2020 को सांबा बॉर्डर पर ही रिगाल के पास बीएसएफ के तलाशी अभियान में सुरंग खोजी गई थी। वहीं, जनवरी 2021 में कठुआ के हीरानगर में सुरंग मिली थी। (संवाद)
सुरंग बनाने में लगाए पेशेवर इंजीनियर
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि सुरंग से घुसपैठ में पाकिस्तानी सेना बेहद पेशेवर इंजीनियरों की सेवाएं ले रही है। सुरंग के लिए ऐसे स्थान चुने जाते हैं, जहां खोदाई आसान हो और पानी के रिसाव का खतरा भी न रहे। अब तक मिलीं ज्यादातर सुरंगें रेतीली और दोमट मिट्टी वाली जमीन पर मिली हैं। इन सुरंगों के ऊपर की जमीन पर टीले जैसी जगह थी।
स्लीपर नेटवर्क भी सक्रिय
कठुआ और सांबा में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर पाकिस्तान के ओवर ग्राउंड वर्कर का नेटवर्क भी सक्रिय है। ऐसे में माना जा रहा है कि सुरंग खोदने से लेकर घुसपैठ के बाद आतंकियों को ठिकानों तक पहुंचाने में यह नेटवर्क काम कर रहा है। पिछले दिनों ही कठुआ जिले के सरहदी इलाके से कुछ लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनके तार घुसपैठ के लिए खोदी गई सुरंग से जुड़ रहे हैं। वहीं, सांबा और जम्मू जिले के सरहदी इलाकों से भी कई संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं।