दिल में दर्द, होंठों पर तड़प, छोड़ दिया अपना आशियाना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाक सीमा से मात्र एक-आध किलोमीटर दूर ज्योड़ा फार्म। सुबह पाकिस्तान की ओर से यहां गोलाबारी किए जाने के बाद पलायन का मंजर दिखा। लोग तांगे और बैलगाड़ियों में जरूरी सामान लाद कर सुरक्षित स्थान की ओर जाते दिखे।
पत्थरों से भरे उबड़-खाबड़ रास्ते में बैलगाड़ियों की कतारें नजर आ रही थीं। लगभग डेढ़ सौ परिवारों वाले गांव के लगभग एक हजार लोग घर से दूर की ओर निकल पड़े थे। घर के सामान के साथ मां रेमा बीबी को तांगे में बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे शौकत अली का कहना था कि सुबह तक गोलाबारी हुई है।
अब गांव में रहना सुरक्षित नहीं रह गया है। बच्चों के साथ तांगे पर जा रही परवीन का पति क्यूम अली उसके साथ नहीं था। बच्चों की सुरक्षा को लेकर वह भी काफी चिंतित नजर आई।
आंखों में घर छोड़ने का दर्द पर कोई चारा भी नहीं
इसी काफिले में शामिल हाशमदीन के अनुसार एक दिन पहले रात को लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। सुबह वापस घरों की ओर लौट रहे थे कि पाकिस्तान की उमरावली और ठठी पोस्ट से हुई गोलाबारी में छह लोग घायल हो गए।
इसके अलावा भैंसें, गाय और बकरियां भी मारी गईं। जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की चिंता बनी हुई है। बशीर मोहम्मद ने कहा कि खाने-पीने, कुछ सामान और जानवरों के लिए चारा लेकर चकरोई के स्कूल में जा रहे हैं।
जब तक इस खाने-पीने से अपना और जानवरों का गुजारा होगा, तब तक चलाएंगे। इरशाद बीबी और जुम्मन दीन भी बच्चों के साथ बैलगाड़ी में जा रहे थे। घर छोड़ने का दुख उनके चेहरे पर स्पष्ट नजर आ रहा था।