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सीमांत गांवों में पाकिस्तानी नेटवर्क का मकड़जाल

Wed, 20 Aug 2014 01:42 AM IST
Updated Wed, 20 Aug 2014 01:42 AM IST
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pak telecom network on international border

सीमांत गांवों के करीब आते ही भारतीय मोबाइल कंपनियों के सिग्नल अचानक बंद हो जाते हैं और पाकिस्तानी नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। बीएसएनएल के कमोजर सिग्नल कहीं आते हैं तो कहीं स्क्रीन से गायब हो जाते हैं।

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भारतीय मोबाइल कंपनियों में से किसी का भी सिम इस इलाके में काम नहीं करता है। लगातार हो रहे सीजफायर के उल्लंघन और घुसपैठ की कोशिशों के बीच सीमांत ग्रामीणों का अन्य इलाकों से मोबाइल संपर्क कटा है।
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अगर साथ में पाकिस्तानी सिम हो तो आसानी से बातचीत संभव है। यह स्थिति आतंकियों के लिए मददगार साबित हो रही है। आरएसपुरा से करोटोना खुर्द के रास्ते में एक किलोमीटर बाद ही पाकिस्तान के तीन मोबाइल कंपनियों के सिग्नल मिलने लगते हैं।
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आतंकी पाकिस्तानी सिम से करते हैं आपरेट

pak telecom network on international border

इनमें जोंग, पाक यूफोन और वरीद टेलीकाम शामिल हैं। जोंग मूलत: चीन की मोबाइल कंपनी है जिसने पाकिस्तान के बाजार में प्रवेश किया है। इसका मुख्यालय इस्तामाबाद में है।

चीन का किसी दूसरे देश में यह पहला मोबाइल नेटवर्क है जिसे पाकिस्तान में 2008 में लाइसेंस मिला। इसके 25.6 मिलियन उपभोक्ता हैं। दूसरी कंपनी पाक यूफोन दुबई आधारित कंपनी है।

पाक के मोबाइल बाजार में प्रवेश करने वाली यह तीसरी विदेशी कंपनी है। पाक बाजार में यह 2001 से काम कर रहा है। पाकिस्तानी यूफोन का नेटवर्क पाकिस्तान में 2336 केंद्रों के अलावा सभी हाईवे और मोटर सड़क पर है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों के कान खड़े

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भारतीय सीमा में पाकिस्तान की तीसरी मोबाइल कंपनी वरीद टेलीकाम का सिग्नल सक्रिय है जो मूल रूप से अबू धाबी की कंपनी है। सीमांत गांव करोटोना खुर्द से पाक सीमा आधा किलोमीटर से भी कम दूरी पर है।

यहां पाकिस्तान की ओर से कुछ दिन पहले भारतीय सीमा में कई सिम कार्ड और जाली नोट फेंके गए थे। बीएसएफ ने इसे बरामद कर लिया, नतीजतन इसका दुरुपयोग नहीं हो पाया। अब आतंकी घुसपैठ के क्रम में अपने साथ पाकिस्तानी सिम लेकर ही आते हैं।

पहले उन्हें सिम कार्ड के लिए भारतीय सीमा में अपने संरक्षणदाता से संपर्क करना पड़ता था लेकिन अब उनके मोबाइल का पाकिस्तानी सिम सीमांत भारतीय इलाकों में भी काम करता है।

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