बिना पैसे के इलाज भी मयस्सर नहीं, किसे सुनाएं दर्द
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सांबा के चलेड़ी गांव के बूटी राम (70) के परिवार पर पाकिस्तान की गोलाबारी से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में उनकी पत्नी शकुंतला देवी और बहू पोली देवी की मौत हो गई है, जबकि बेटा सौदागर, पौत्र कुलदीप और कौशल गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जो जीएमसी अस्पताल में हैं। बूटी राम की हालत भी गंभीर है। आलम तो यह है कि दवाई और टेस्ट और खून का प्रबंध करने के लिए भी परिवार का कोई सदस्य नहीं बचा।
पाकिस्तान की गोलाबारी में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचते ही तत्काल मदद पहुंचाए जाने की जरूरत है। सुचेतगढ़ के विधायक शाम लाल चौधरी का कहना है कि उनसे गोलाबारी के घायल ने दवाई के लिए पांच सौ रुपये मांगें और उन्होंने वह दिए।
सरकार और अस्पताल प्रशासन को कम से कम जीएमसी पहुंचने वाले घायलों के लिए विशेष इंतजाम करना चाहिए। कई परिवारों के सभी सदस्य घायल हैं। वह दवाई, टेस्ट और खून का प्रबंध कैसे करें। सरकार अनुदान सहायता जारी करती है लेकिन उसे समय पर दिए जाने की जरूरत है।
नेताओं, अफसरों और मीडिया के सामने रोये तीमारदार
एक तरफ पाकिस्तान सीमावर्ती लोगों को निशाना बना रहा है, जिसमें अब तक कई लोग घायल हो चुके हैं, वहीं घायलों का बिना पैसे के इलाज में मयस्सर नहीं हो पा रहा है। नेताओं, अफसरों और मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए तीमारदार फफक पड़े।
घायलों को अस्पताल पहुंचने से लेकर खून, टेस्ट और दवाई तक के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। आलम तो यह है कि कई परिवारों के लगभग सभी सदस्य घायल होने की वजह से दवाई लाने वाला तक नहीं बचा है।
आनन-फानन में घायलों को अस्पताल पहुंचाए जाने पर जिन लोगों के पास पैसे नहीं हैं, उन्हें एक-दूसरे का मुंह ताकना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन या सरकार की तरफ से बदइंतजामी पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। हालत तो यह है कि रेहड़े पर लोग घायलों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
अस्पताल, खून, टेस्ट और दवाई तक को जद्दोजहद
आरएस पुरा के ज्योड़ा फार्म में पाकिस्तान की गोलाबारी में घायल छह लोगों के साथ जीएमसी में पहुंचे बरकत अली के अनुसार पाकिस्तान की भारी गोलाबारी में घायल छह लोगों को करीब बारह किलोमीटर दूर आरएस पुरा अस्पताल ट्रैक्टर से पहुंचाया।
अस्पताल से सभी घायलों को जम्मू के राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल में रेफर तो किया गया है लेकिन यहां पर खून, टेस्ट और दवाई तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार और अस्पताल प्रशासन की ओर से र्कोई विशेष इंतजाम गोलाबारी में घायलों के लिए नहीं किए गए हैं।
बरकत अली ने कहा कि ज्योड़ा फार्म में सुबह पौने चार बजे फटे मोर्टार शैल से मोहम्मद काजिम (55) घायल हुए। पहले उन्हें रेहड़े से आरएसपुरा अस्पताल पहुंचाया गया।
कई परिवारों में तीमारदारी करने वाला भी नहीं बचा
इसके बाद सुबह सात बजे गोलाबारी से एक ही परिवार के चार सदस्य शाद अली (30), उनकी पत्नी बानू देवी, पुत्र रफीक (12), बहन गुलाम फातिमा घायल हुई। इसके अलावा दाऊद (30 ) घायल हुए हैं।
घायलों को आरएस पुरा अस्पताल ले जाने के लिए कोई गाड़ी तक नहीं थी। ट्रैक्टर से इन्हें अस्पताल पहुंचाया गया और वहां से एंबुलेंस से जीएमसी उपचार के लिए पहुंचे हैं। यहां भी कोई इंतजाम नहीं है।
जिन परिवारों के लगभग सभी सदस्य घायल हैं, उनके लिए दवाई, टेस्ट और खून तक के इंतजाम में मुश्किल आ रही है। सरकार को घायलों के लिए विशेष इंतजाम करना चाहिए।
घायलों का हालचाल पूछने के लिए बुधवार को जीएमसी अस्पताल पहुंचे बीएसएफ महानिदेशक डीके पाठक और विधायकों तक से लोगों ने इस बाबत शिकायत की और बदइंतजामी पर नाराजगी जताई।