Pahalgam Attack: एक आदिल ने किया हमला तो....दूसरे आदिल ने पर्यटकों को बचाने के लिए अपने सीने पर खाई गोलियां
पहलगाम हमले में एक ओर जहां आतंकी आदिल गुरी ने पर्यटकों पर हमला किया, वहीं टट्टूवाले आदिल हुसैन ने अपनी जान देकर पर्यटकों को बचाकर असली हीरो बन गया।
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पहलगाम हमले के बाद एक जैसे नाम वाले दो किरदार सुर्खियों में है, जिसमें एक आदिल वो खूंखार हमलावर है, जिसने कश्मीर घूमने पहुंचे पर्यटकों पर गोलियां बरसाईं। तो दूसरे आदिल ने पर्यटकों को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी और आखिर में सीने पर तीन गोलियां खाकर अपनी जान भी गंवा दी।
इन दोनों के जीवन की कहानी और फितरत एकदम जुदा हैं, एक फरार हत्यारा है और दूसरा नायक बन चुका है। इनके नामों का उच्चारण एक जैसा है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अंग्रेजी में इन्हें थोड़ा अलग-अलग तरह से लिख रही हैं। आदिल (एएडीआईए) ठोकार उर्फ आदिल गुरी लश्करे तैयबा का सदस्य है, और आतंकी हमले में शामिल होने के कारण उसका घर शुक्रवार को बम से उड़ा दिया गया। वहीं, आदिल (एडीआईएल) हुसैन शाह एक गरीब और बहादुर टट्टू वाला था।
अधिकारियों ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर के बिजबेहरा के गुरी गांव निवासी आदिल गुरी उम्र के तीसरे दशक के अंतिम पड़ाव पर है और आदिल हुसैन (30) उससे थोड़ा ही बड़ा था। आदिल हुसैन अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। वह आजीविका के लिए पहलगाम के पर्यटकों को टट्टू पर बैठाकर आसपास की दर्शनीय जगहों पर ले जाता था। आदिल एकमात्र कश्मीरी था, जिसे हथियारबंद बंदूकधारियों ने मारा। उसकी मौत से परिजन आहत तो हैं लेकिन उनकी वीरता पर गर्व भी कर रहे हैं।
सुबह से ही कुछ होने का सता रहा था अंदेशा
आदिल हुसैन की बहन अस्मा ने बताया, सुबह से ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ बुरा होने वाला है। मैंने उसे जाने से मना भी किया। लेकिन वह चला गया। अस्मा ने बताया कि भाई हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहता था। पिता सैयद हैदर शाह ने कहा, आतंकियों ने मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसने उनका सामना किया। उन्हें पर्यटकों को नुकसान न पहुंचाने को कहा। भाई नौशाद ने भी आदिल की बहादुरी पर गर्व जताया।
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वैध यात्रा दस्तावेज पर पाक जाने के बाद लापता हो गया था आदिल गुरी
फरार हमलावरों में शामिल आदिल गुरी 2018 में वैध यात्रा दस्तावेज पर पाकिस्तान गया था और उसके बाद गायब हो गया था। बाद में ऐसी खबरें आईं कि प्रतिबंधित आतंकी समूह लश्कर में शामिल हो गया। अधिकारियों के मुताबिक, वह 2024 में नियंत्रण रेखा के रास्ते भारत लौट आया। वह जम्मू क्षेत्र के डोडा और किश्तवाड़ इलाकों में सक्रिय था। पहलगाम हमले में मारे गए लोगों में से एक की पत्नी ने आदिल गुरी की पहचान हमलावर के तौर पर की है।
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बहन बोली, मेरा भाई मुजाहिदीन, परिवार भुगत रहा सजा
आदिल गुरी की बहन ने कहा-मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिद्दीन है। जब मैं अपने ससुराल से यहां आई तो अपने माता-पिता और भाई-बहनों को उनके घर पर नहीं पाया। पुलिस सभी को ले गई थी। बहन ने कहा-मेरा परिवार निर्दोष है। उसे भाई के किए की सजा भुगतनी पड़ रही है। हालांकि, उसने पहलगाम हमले में आदिल गुरी के शामिल होने के बारे में कोई जानकारी होने से इन्कार किया।