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Jammu News: डॉ. घनश्याम को जीएमसी के प्रिंसिपल पद पर नियमित करने का आदेश
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जम्मू। जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने जीएमसी जम्मू के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. घनश्याम देव को बतौर प्रिंसिपल पद पर नियमित करने का आदेश दिया है। साथ ही तीन महीने में पूर्ण वेतनमान, बकाया और पेंशन लाभ देने का भी आदेश दिया।
न्यायाधीश संजीव कुमार एवं संजय परिहार की खंडपीठ ने बुधवार मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। खंडपीठ ने डाॅ. घनश्याम को लाभ देने से इन्कार करने पर सरकार की आलोचना करते हुए इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण करार दिया।
सरकार को आदेश दिया कि डॉ. घनश्याम की 23 अप्रैल 2014 से दो दिसंबर 2015 तक प्राचार्य के रूप में सेवाएं नियमित की जाएं। तीन दिसंबर 2015 से 30 सितंबर 2019 को उनकी सेवानिवृत्ति तक उनके पक्ष में प्रिंसिपल का वेतनमान जारी किया जाए। बकाया राशि, संशोधित पेंशन और सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। सरकार को आदेश लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
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खंडपीठ ने कहा कि डाॅ. घनश्याम ने अप्रैल 2014 और दिसंबर 2015 के बीच प्रधानाचार्य के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्हें अनौपचारिक रूप से हटा दिया गया और प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त कर दिया गया जबकि उनके दो जूनियरों डाॅ. जाहिद हुसैन गिलानी और सुनंदा रैना को प्रिंसिपल के रूप में नियमित किया गया। उन्हें उच्च वेतन और पेंशन के साथ सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई।
न्यायालय इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर सकता कि प्रतिवादी से जूनियर दो डाॅक्टर पूर्ण लाभों के साथ प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो गए जबकि सबसे वरिष्ठ अधिकारी को इससे वंचित रखा गया। पीठ ने टिप्पणी की और कहा कि स्थापना सह चयन समिति ने 2012 में ही डाॅ. घनश्याम को मूल पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी थी। फिर उन्हें लाभ क्यों नहीं दिए गए। जेएनएफ
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न्यायाधीश संजीव कुमार एवं संजय परिहार की खंडपीठ ने बुधवार मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। खंडपीठ ने डाॅ. घनश्याम को लाभ देने से इन्कार करने पर सरकार की आलोचना करते हुए इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण करार दिया।
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सरकार को आदेश दिया कि डॉ. घनश्याम की 23 अप्रैल 2014 से दो दिसंबर 2015 तक प्राचार्य के रूप में सेवाएं नियमित की जाएं। तीन दिसंबर 2015 से 30 सितंबर 2019 को उनकी सेवानिवृत्ति तक उनके पक्ष में प्रिंसिपल का वेतनमान जारी किया जाए। बकाया राशि, संशोधित पेंशन और सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। सरकार को आदेश लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
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खंडपीठ ने कहा कि डाॅ. घनश्याम ने अप्रैल 2014 और दिसंबर 2015 के बीच प्रधानाचार्य के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्हें अनौपचारिक रूप से हटा दिया गया और प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त कर दिया गया जबकि उनके दो जूनियरों डाॅ. जाहिद हुसैन गिलानी और सुनंदा रैना को प्रिंसिपल के रूप में नियमित किया गया। उन्हें उच्च वेतन और पेंशन के साथ सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई।
न्यायालय इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर सकता कि प्रतिवादी से जूनियर दो डाॅक्टर पूर्ण लाभों के साथ प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो गए जबकि सबसे वरिष्ठ अधिकारी को इससे वंचित रखा गया। पीठ ने टिप्पणी की और कहा कि स्थापना सह चयन समिति ने 2012 में ही डाॅ. घनश्याम को मूल पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी थी। फिर उन्हें लाभ क्यों नहीं दिए गए। जेएनएफ