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सेवानिवृत्त आईएएस को नियमित पेंशन, सेवा लाभ देने के आदेश
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जम्मू। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल की बेंच के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी और एडमिनिस्ट्रेशन सदस्य प्रदीप कुमार की खंडपीठ ने एक बीस साल पुराने मामले में सेवानिवृत्त आईएएस को नियमित पेंशन और सेवा लाभ दिए जाने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर कैडर में मिर्जा हबीब-उल-हसन बेग 1980 बैच के आईएएस अधिकारी थे। 30 मई 1997 में उन्हें आय से अधिक संपत्ति के आरोप में निलंबित कर दिया गया। वहीं इससे पहले 4 अप्रैल 1997 को कैडर के अन्य साथियों को एसटीएस (सुपर टाइम स्केल) में पदोन्नति दी गई। लेकिन मिर्जा हबीब को पदोन्नति नहीं मिली। इसके बाद 20 अप्रैल 2001 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया। 31 अगस्त 2003 में मिर्जा हबी सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन उन्हें नियमित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति के लाभ नहीं मिले। उन्होंने इसके विरोध में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें राहत का दावा किया गया। आवेदक का तर्क था कि जब एसटीएस में पदोन्नति के लिए डीपीसी हुई तो उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। इसके बावजूद उसे पदोन्नति से वंचित क्यों किया गया। अब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याची को नियमित पेंशन और सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं।
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जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर कैडर में मिर्जा हबीब-उल-हसन बेग 1980 बैच के आईएएस अधिकारी थे। 30 मई 1997 में उन्हें आय से अधिक संपत्ति के आरोप में निलंबित कर दिया गया। वहीं इससे पहले 4 अप्रैल 1997 को कैडर के अन्य साथियों को एसटीएस (सुपर टाइम स्केल) में पदोन्नति दी गई। लेकिन मिर्जा हबीब को पदोन्नति नहीं मिली। इसके बाद 20 अप्रैल 2001 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया। 31 अगस्त 2003 में मिर्जा हबी सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन उन्हें नियमित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति के लाभ नहीं मिले। उन्होंने इसके विरोध में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें राहत का दावा किया गया। आवेदक का तर्क था कि जब एसटीएस में पदोन्नति के लिए डीपीसी हुई तो उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। इसके बावजूद उसे पदोन्नति से वंचित क्यों किया गया। अब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याची को नियमित पेंशन और सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं।
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