ऑपरेशन 'शेरूवाली का नौवां दिन: राजोरी के जंगलों में गोलियों की गूंज, ड्रोन और डॉग स्क्वॉड से हो रही निगरानी
राजोरी के मंजाकोट सेक्टर के डोरिमल-गंभीर मुगला क्षेत्र के घने जंगलों में आतंकियों की तलाश के लिए चलाया जा रहा ऑपरेशन शेरूवाली नौवें दिन भी जारी रहा। ड्रोन, खोजी कुत्तों और भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद अब तक आतंकियों का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजोरी जिले के मंजाकोट सेक्टर के डोरिमल-गंभीर मुगला क्षेत्र के घने और कंटीले जंगलों में आतंकियों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन शेरूवाली रविवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार नौ दिनों से सेना, पुलिस, पैरा कमांडो और अन्य सुरक्षा एजेंसियां दुर्गम पहाड़ी और वन क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चला रही हैं, लेकिन अब तक आतंकियों का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है।सूत्रों के अनुसार, जंगल के भीतर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद शुरू किए गए इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने कई बार घेराबंदी और तलाशी अभियान को तेज किया। बीच-बीच में जंगल के विभिन्न हिस्सों से गोलाबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल जैसी आवाजें सुनाई देती रहीं, जिससे पूरा वन क्षेत्र गूंज उठा। सुरक्षा बलों द्वारा संभावित ठिकानों और छिपने के स्थानों को निशाना बनाकर सर्च ऑपरेशन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अभियान में आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। आतंकियों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए ड्रोन, खोजी कुत्तों तथा हवाई निगरानी के अन्य साधनों का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां जंगल के हर संभावित मार्ग और प्राकृतिक ठिकाने की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिल सके।गौरतलब है कि अभियान के दौरान पहले जंगल क्षेत्र में एक प्राकृतिक ठिकाना (हाइडआउट) भी बरामद किया गया था, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि आतंकी लंबे समय से इस दुर्गम इलाके का इस्तेमाल शरणस्थल के रूप में कर रहे थे। हालांकि अब तक किसी आतंकी की गिरफ्तारी या मुठभेड़ में सफलता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उच्च सुरक्षा अधिकारियों की पूरे अभियान पर लगातार नजर बनी हुई है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि घने जंगल, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं, फिर भी ऑपरेशन को पूरी सतर्कता और रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकियों की मौजूदगी की संभावना पूरी तरह समाप्त होने तक ऑपरेशन जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिकारी अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं।