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ऑपरेशन ऑल आउट: अब आतंकियों पर कहर बन कर टूटेंगे सुरक्षाबल, सेना को मिलेगी अधिक आजादी
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:39 AM IST
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ऑपरेशन ऑल आउट
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आतंकियों के खात्मे को चलाए जाने वाले ऑपरेशन ऑलआउट से राजनीति आउट हो गई है। अब सुरक्षाबल बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे। कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर राजनीति भारी पड़ रही थी। रमजान में एकतरफा सीजफायर करने का फैसला भारी पड़ा। आतंकी सेना और पुलिस पर हावी हो गए थे।
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सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस को चार दिन पहले ही बोल दिया गया था कि आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करें। इसमें कोई राजनीति हस्तक्षेप नहीं होगा। तीन दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एकतरफा सीजफायर को वापिस कर लिया। उसके अगले ही दिन सेना प्रमुख रियासत के दौरे पर पहुंच गए। आपरेशन आल आउट में कहीं न कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप एक बड़ा रोड़ा बन गया था।
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रक्षा विशेषज्ञों की भी राय है कि अब सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। एकतरफा सीजफायर का आखिर नतीजा क्या हुआ।
आतंक का गढ़ बन गया था दक्षिण कश्मीर
कश्मीर का दक्षिण इलाका पीडीपी और जमातिया इस्लाम का गढ़ है। यह इलाका पूरी तरह से आतंकवाद ग्रस्त है और आतंकी इसमें हावी हो गए थे क्योंकि राजनीतिक हस्तक्षेप था। अब सेना और पुलिस पूरी तरह से आजाद हैं। वह आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
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रक्षा विशेषज्ञ, पूर्व बिग्रेडियर अनिल गुप्ता
बिना राजनीति के होगी कार्रवाई
राजनीतिक हस्तक्षेप हमेशा ही सैन्य कार्रवाई को प्रभावित करता है। निश्चित तौर पर अब सेना और पुलिस अधिक मजबूती से काम करेगी और इसका नतीजा भी सामने आएगा। उम्मीद है कि घाटी में आतंकियों का खात्मा होगा।
रक्षा विशेषज्ञ, पूर्व कैप्टन, अनिल घौर
राज्यपाल पर निर्भर करेगा
यह देखना होगा कि राज्यपाल आतंकवाद को लेकर किसी तरह का रुख अपनाते हैं। किस तरह से काम होता है। आतंकियों के खिलाफ क्या रणनीति है। यह देखना होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के हमेशा ही सेना की कार्रवाई कारागार साबित होती है।
पूर्व डीजीपी, जम्मू कश्मीर पुलिस, एमएम खजुरिया