जम्मू कश्मीरः एक लाख अस्थायी मुलाजिमों को तीन महीने से वेतन नहीं, असमंजस में नौकरी
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केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू कश्मीर में एक लाख से अधिक अस्थायी मुलाजिमों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। नियमितीकरण की योजना का कहीं अता पता नहीं है। उल्टा नौकरी को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। ऐसे में मुलाजिमों के संगठनों ने सचिवालय से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे के गरमाने के भी आसार हैं।
प्रदेश में बिजली और पीएचई समेत कई विभागों में एक लाख से अधिक अस्थायी मुलाजिम हैं। डेली वेजर श्रेणी के इन मुलाजिमों को नियमितीकरण का मामला लंबे समय से अधर में है। पूर्ववर्ती महबूबा सरकार और फिर राज्यपाल शासन के दौरान नियमितीकरण पर कवायद तेज हुई। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। तीन महीने से वेतन नहीं भी मिला है।
पीएचई विभाग के अस्थायी मुलाजिमों की यूनियन के अध्यक्ष तनवीर हुसैन ने बताया कि पीएचई विभाग में 22 हजार से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने नियमित करने की कवायद शुरू की थी। कमेटियों का गठन भी किया गया। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश में एलजी प्रशासन के आने से फिर संशय बन गया है।
आने वाले दिनों में गरमा सकता है ये मामला
पिछले तीन महीने से अस्थायी कर्मचारियों को वेतन तक जारी नहीं किया गया है। यूनियन के प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाम जाजू से मुलाकात कर चुके हैं। जल्द ही वे एलजी गिरीश चंद्र मुर्मू से मुलाकात करेंगे।
बिजली विभाग के डेलीवेजर एसोसिएशन के पदाधिकारी सुरजीत खजूरिया के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से भविष्य पर संकट गहरा गया है। नागरिक सचिवालय में अधिकारियों से प्रतिनिधिमंडल आए दिन मिल रहे हैं। लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। आगामी दिनों में यह मामला गरमाना तय है। इस मामले में सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव फारूक अहमद लोन से बात नहीं हो सकी।
किस विभाग में कितने दैनिक मजदूर
पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग 38585
बिजली विभाग 13412
स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग 13788
लोक निर्माण विभाग 6801
अन्य विभागों में 35000