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Jammu News: जनसुनवाई के लिए एक ही दिन का सदन, अटकेंगे चार माह के लंबित मामले
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सतीश वालिया
जम्मू। जनसुनवाई के लिए सदन की प्रक्रिया एक ही दिन की होगी। चार माह बाद लगने वाले जनरल हाउस को दो दिन होना चाहिए था। इससे 75 पार्षदों की समस्याओं का निदान हो जाना था। मगर एक दिन के लिए लंबे अंतराल के बाद लग रहे हाउस में जरूरी मसलों का हल नहीं हो पाएगा। यह आरोप भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों का है। पार्षदों के अनुसार हाउस दो दिन का लगाया जाना चाहिए था। वार्डों में कई विकास कार्य शुरू करने के लिए अभी तक फैसला नहीं हुआ। वहीं, बरसात में नाले, नालियों और अन्य मुद्दे हैं, जिनके लिए बजट ही नहीं मिला है।
पार्षदों का कहना है कि हाउस अगले माह हो सकता था। इतने व्यस्त समय में लगाना जरूरी नहीं है। इसमें काम और पार्षदों की मांगों को सही तरीके से नहीं सुना जाएगा। जब पार्षदों की राय जानी गई तो सामने आया कि भाजपा के आधे से ज्यादा यानी 24 पार्षद दो दिन का हाउस चाहते हैं। वर्तमान में भाजपा के 43 पार्षद हैं। एक पार्षद की मौत हो गई है। 19 पार्षद एक दिन के काम से संतुष्ट है। इसी तरह कांग्रेस के 14 और निर्दलीय 17 पार्षद दो दिन का हाउस चाहते हैं।
पार्षदों के अनुसार पहले जनरल हाउस की बैठक 23 और 24 को होनी थी। मगर गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के चलते 23 के बजाय 24 को एक दिन का सदन किया गया। इससे पहले जनवरी 30 और 31 को जनरल हाउस की बैठक हुई। इसके बाद अभी तक बैठक नहीं हो पाई है। अब दो दिन बैठक होनी थी। लंबित काम को पूरा करना था, पर एक दिन में प्रस्ताव और पार्षदों के प्रश्नों के ही उतर देने पर प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। अन्य मसलों पर कब मंथन होगा। बरसात आने वाली है। हर बार शहर जलमग्न होता है। इस बार जो काम हुआ है, उस पर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। बारिश होने पर जलभराव की समस्या रहती है। इसके अलावा बिजली, पानी, सड़कों, वाटर कूलर, सफाई जैसे मसलों पर मंथन नहीं हो सकेगा। यह सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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प्रश्नकाल और प्रस्ताव के लिए समय घटा
एक दिन के लिए हाउस चलने के कारण कार्रवाई को भी कर दिया है। जहां पर प्रश्नकाल तीन घंटे के लिए चलना था उसे दो घंटे में निपटाने की तैयारी है। इसी तरह प्रस्ताव सत्र भी तीन की जगह दो घंटे में निपटाया जाना है। इसके बाद शहर की समस्याओं पर मंथन किया जाना है। यानी हाउस की कार्रवाई सुबह साढ़े दस बजे आरंभ होगी। 11 बजे हाउस चलेगा। इसमें लंच ब्रेक तक प्रस्ताव और इसके बाद प्रश्नकाल होना है। इसके बाद सामान्य मुद्दों पर चर्चा होनी है। हालांकि हर बार हाउस दो दिन के लिए लगता है। इसमें प्रश्नकाल और प्रस्ताव के लिए ज्यादा समय रखा जाता है। इसमें पार्षद प्रस्ताव के बाद 10 से 15 मिनट तक अपने सुझाव देते थे। इस बार समय में 44 प्रश्नों की जगह पर 31, प्रस्ताव 42 की जगह पर सिर्फ 14 और पार्षदों की मांगें सिर्फ 12 ली गई हैं।
बैठक अगले माह हो सकती थी। इसमें प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती है। चार माह बाद हाउस लग रहा है।
- अमित गुप्ता, निर्दलीय पार्षद, वार्ड नंबर 19
हाउस में लोगों की समस्याओं का निदान किया जाना है। इसमें समय चाहिए। एक दिन हाउस लगाने से कैसे समस्याएं हल होंगी।
- पूर्णिमा शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर
चार माह हाउस हो रहा है। इसे दो दिन का रखा जाना चाहिए। पार्षदों की समस्याओं का निदान सही तरीके से हो पाना था। अब फिर कार्रवाई अगले हाउस के लिए रखी जाएगी।
- चंद्र मोहन गुप्ता, पूर्व मेयर
वीआईपी दौरा है तो अगले माह हाउस काल करना चाहिए था। एक दिन में पार्षदों के प्रस्ताव और प्रश्नों की सही से सुनवाई नहीं होगी। साफ है कि पार्षदों की आवाज को दबाया जा रहा है।
- शौकत अली, पार्षद, वार्ड नंबर 74
पहले हाउस लगाने के लिए विपक्ष ने प्रदर्शन किया। अब लगाया जा रहा है वो भी औपचारिकता मात्र ही है। आधे से ज्यादा प्रश्नों और प्रस्तावों को काट दिया गया है। हाउस का क्या फायदा है।
- द्वारका चौधरी, नेता विपक्ष
पहले ही वार्डों में विकास कार्य अधर में लटके हैं। हाउस में बात रखने का मौका मिलना था। एक दिन में कैसे कार्रवाई पूरी होगी। हाउस औपचारिकता मात्र ही है।
- प्रो. युद्धवीर सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर 73
हाउस 24 को लगने जा रहा है। इसमें वार्ड की समस्याओं को रखा जाएगा। पहले भी एक ही दिन का हाउस होता था। कोई नई बात नहीं है।
नरोत्तम शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 3
हाउस दो दिन का होना चाहिए था। इस बार एक दिन का किया गया है। एक ही दिन में कार्रवाई को पूरा किया जाएगा। प्रस्ताव पहले ही भेज दिए गए हैं।
- गोपाल गुप्ता, पार्षद, वार्ड नंबर 5
कोट
लंबे अंतराल के बाद हाउस हो रहा है। कार्रवाई को पूरा किया जाएगा। हाउस में हर पार्षद की मांग को सुना जाएगा और हल करवाया जाएगा।
- राजेंद्र शर्मा, मेयर
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जम्मू। जनसुनवाई के लिए सदन की प्रक्रिया एक ही दिन की होगी। चार माह बाद लगने वाले जनरल हाउस को दो दिन होना चाहिए था। इससे 75 पार्षदों की समस्याओं का निदान हो जाना था। मगर एक दिन के लिए लंबे अंतराल के बाद लग रहे हाउस में जरूरी मसलों का हल नहीं हो पाएगा। यह आरोप भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों का है। पार्षदों के अनुसार हाउस दो दिन का लगाया जाना चाहिए था। वार्डों में कई विकास कार्य शुरू करने के लिए अभी तक फैसला नहीं हुआ। वहीं, बरसात में नाले, नालियों और अन्य मुद्दे हैं, जिनके लिए बजट ही नहीं मिला है।
पार्षदों का कहना है कि हाउस अगले माह हो सकता था। इतने व्यस्त समय में लगाना जरूरी नहीं है। इसमें काम और पार्षदों की मांगों को सही तरीके से नहीं सुना जाएगा। जब पार्षदों की राय जानी गई तो सामने आया कि भाजपा के आधे से ज्यादा यानी 24 पार्षद दो दिन का हाउस चाहते हैं। वर्तमान में भाजपा के 43 पार्षद हैं। एक पार्षद की मौत हो गई है। 19 पार्षद एक दिन के काम से संतुष्ट है। इसी तरह कांग्रेस के 14 और निर्दलीय 17 पार्षद दो दिन का हाउस चाहते हैं।
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पार्षदों के अनुसार पहले जनरल हाउस की बैठक 23 और 24 को होनी थी। मगर गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के चलते 23 के बजाय 24 को एक दिन का सदन किया गया। इससे पहले जनवरी 30 और 31 को जनरल हाउस की बैठक हुई। इसके बाद अभी तक बैठक नहीं हो पाई है। अब दो दिन बैठक होनी थी। लंबित काम को पूरा करना था, पर एक दिन में प्रस्ताव और पार्षदों के प्रश्नों के ही उतर देने पर प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। अन्य मसलों पर कब मंथन होगा। बरसात आने वाली है। हर बार शहर जलमग्न होता है। इस बार जो काम हुआ है, उस पर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। बारिश होने पर जलभराव की समस्या रहती है। इसके अलावा बिजली, पानी, सड़कों, वाटर कूलर, सफाई जैसे मसलों पर मंथन नहीं हो सकेगा। यह सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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प्रश्नकाल और प्रस्ताव के लिए समय घटा
एक दिन के लिए हाउस चलने के कारण कार्रवाई को भी कर दिया है। जहां पर प्रश्नकाल तीन घंटे के लिए चलना था उसे दो घंटे में निपटाने की तैयारी है। इसी तरह प्रस्ताव सत्र भी तीन की जगह दो घंटे में निपटाया जाना है। इसके बाद शहर की समस्याओं पर मंथन किया जाना है। यानी हाउस की कार्रवाई सुबह साढ़े दस बजे आरंभ होगी। 11 बजे हाउस चलेगा। इसमें लंच ब्रेक तक प्रस्ताव और इसके बाद प्रश्नकाल होना है। इसके बाद सामान्य मुद्दों पर चर्चा होनी है। हालांकि हर बार हाउस दो दिन के लिए लगता है। इसमें प्रश्नकाल और प्रस्ताव के लिए ज्यादा समय रखा जाता है। इसमें पार्षद प्रस्ताव के बाद 10 से 15 मिनट तक अपने सुझाव देते थे। इस बार समय में 44 प्रश्नों की जगह पर 31, प्रस्ताव 42 की जगह पर सिर्फ 14 और पार्षदों की मांगें सिर्फ 12 ली गई हैं।
बैठक अगले माह हो सकती थी। इसमें प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती है। चार माह बाद हाउस लग रहा है।
- अमित गुप्ता, निर्दलीय पार्षद, वार्ड नंबर 19
हाउस में लोगों की समस्याओं का निदान किया जाना है। इसमें समय चाहिए। एक दिन हाउस लगाने से कैसे समस्याएं हल होंगी।
- पूर्णिमा शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर
चार माह हाउस हो रहा है। इसे दो दिन का रखा जाना चाहिए। पार्षदों की समस्याओं का निदान सही तरीके से हो पाना था। अब फिर कार्रवाई अगले हाउस के लिए रखी जाएगी।
- चंद्र मोहन गुप्ता, पूर्व मेयर
वीआईपी दौरा है तो अगले माह हाउस काल करना चाहिए था। एक दिन में पार्षदों के प्रस्ताव और प्रश्नों की सही से सुनवाई नहीं होगी। साफ है कि पार्षदों की आवाज को दबाया जा रहा है।
- शौकत अली, पार्षद, वार्ड नंबर 74
पहले हाउस लगाने के लिए विपक्ष ने प्रदर्शन किया। अब लगाया जा रहा है वो भी औपचारिकता मात्र ही है। आधे से ज्यादा प्रश्नों और प्रस्तावों को काट दिया गया है। हाउस का क्या फायदा है।
- द्वारका चौधरी, नेता विपक्ष
पहले ही वार्डों में विकास कार्य अधर में लटके हैं। हाउस में बात रखने का मौका मिलना था। एक दिन में कैसे कार्रवाई पूरी होगी। हाउस औपचारिकता मात्र ही है।
- प्रो. युद्धवीर सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर 73
हाउस 24 को लगने जा रहा है। इसमें वार्ड की समस्याओं को रखा जाएगा। पहले भी एक ही दिन का हाउस होता था। कोई नई बात नहीं है।
नरोत्तम शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 3
हाउस दो दिन का होना चाहिए था। इस बार एक दिन का किया गया है। एक ही दिन में कार्रवाई को पूरा किया जाएगा। प्रस्ताव पहले ही भेज दिए गए हैं।
- गोपाल गुप्ता, पार्षद, वार्ड नंबर 5
कोट
लंबे अंतराल के बाद हाउस हो रहा है। कार्रवाई को पूरा किया जाएगा। हाउस में हर पार्षद की मांग को सुना जाएगा और हल करवाया जाएगा।
- राजेंद्र शर्मा, मेयर