कुछ कहते हैं मोदी सरकार पर उमर के नरम तेवर
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कभी खामोशी ज्यादा मुखर होती है और नरम तेवर भावी रणनीति का संकेत दे जाता है। हर बात पर ट्विट के जरिये अपनी बेबाक राय जाहिर करने के लिए चर्चित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हाल के दिनों की चुप्पी नए सियासी समीकरणों की संभावनाओं की ओर इशारा करती है।
उमर के आलोचक भी उनकी साफगोई के प्रशंसक रहे हैं। उन्हें जो भाता है उसे खुले दिल से सराहते हैं और जो गले के नीचे नहीं उतरता उस पर तल्ख राय के इजहार से भी नहीं चूकते। उमर की यह फितरत इन दिनों बदली-बदली दिख रही है, जिसके सियासी निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं।
चुनाव के दिनों में नरेंद्र मोदी पर जमकर प्रहार करने वाले मुख्यमंत्री उमर का चुनाव नतीजों के बाद सुर नरम हुआ लेकिन यूपीए के प्रति उनकी प्रतिबद्धता समय-समय पर जाहिर होती रही।
मोदी के मुरीद होते जा रहे हैं
उमर ने उदार रवैया अपनाया और जिस अरुण जेटली को किश्तवाड़ के दंगे के बाद रियासत में घुसने की इजाजत नहीं दी थी, वह जब वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में आए तो खुले दिल से स्वागत किया।
जेटली से मुलाकात के बाद ट्विट पर उन्होंने अपना उत्साह भी जाहिर किया और मुलाकात को सकारात्मक कहा। मोदी के पीएम बनने के बाद से उमर की उनसे दो मुलाकातें हो चुकी हैं।
पहली मुलाकात दिल्ली में औपचारिकता वश थी और दूसरी मोदी के रियासत दौरे के क्रम में प्रोटोकाल का तकाजा लेकिन उमर मोदी के मुरीद होते नजर आए।
रेल बजट पर उमर खामोश रहे
पहले मोदी के अच्छे दिन लाने के नारे पर कटाक्ष करने वाले उमर को यूपीए रेल बजट निराशाजनक नहीं लगा। पहले बढ़ा किराया शायद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जरूरी लगा हो, यही कारण है कि वह तल्ख टिप्पणियों से बचते रहे।
इस बार उन्होंने बजट पेश किए जाने से पहले उम्मीदें तो जताई लेकिन बजट पेश किए जाने के बाद चिंतक अंदाज में बैंकरों और सीईओ की टिप्पणियों तक सीमित रहे। पहले उन्होंने कहा कि 2014 के आम बजट का इंतजार है।
उम्मीद है कि आम बजट में रियासत में ढांचागत व्यवस्था को सुधारने और संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ स्थान दिया जाएगा। साथ ही इस बात की भी उम्मीद कर रहा हूं कि बजट में केंद्र सरकार के पास दो साल से लंबित पड़े विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के पैकेज के मसले में भी कोई कदम उठाया जाएगा।
कांग्रेस से बढ़ रही नेकां की दूरी
जेटली के बजट के बाद टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीटर पर लिखा कि अभी तक उन्होंने किसी भी सीईओ अथवा बैंकर को टीवी पर बजट पर नकारात्मक टिप्पणी करते हुए नहीं सुना है। इस तरह वह सीधी टिप्पणी से कन्नी काट गए।
गौरतलब है कि नेशनल कांफ्रेंस अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में एनडीए का हिस्सा रही है। नेकां कभी केंद्र से टकराव की हिमायती नहीं रही। वह केंद्र के साथ चलकर रियासत के लिए बेहतर फंडिंग की पक्षधर रही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के साथ अब नेकां के रिश्ते में गाढ़ी खटास है।
उमर दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले हैं लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन का खाका तैयार नहीं हो पाया। कांग्रेस के रियासती नेता नेकां के खिलाफ हैं और गुलाम नबी आजाद की पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद से मुलाकात हो चुकी है। ऐसे में उमर की चुप्पी वैकल्पिक सियासी रास्ते की तलाश भी हो सकती है।